
भोपाल। मध्यप्रदेश में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। भोपाल में हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई पर लगातार नजर रखी जाए, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर सरकार की नजर
भोपाल में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता पर विशेष चर्चा हुई। बैठक के बाद सरकार की ओर से बताया गया कि फिलहाल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाए। इससे किसी भी संभावित संकट की स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर अस्थायी रोक
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप के मुताबिक, केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद सोमवार से मध्यप्रदेश में कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की डिलीवरी पर रोक लगाई गई है। यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने तनावपूर्ण हालात को देखते हुए एहतियात के तौर पर उठाया गया है। हालांकि सरकार का कहना है कि इससे आम उपभोक्ताओं को प्रभावित होने की आशंका नहीं है।
घरेलू गैस की सप्लाई जारी, उपभोक्ताओं को राहत
राज्य में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पहले की तरह जारी है। अधिकारियों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस सिलेंडर की उपलब्धता में किसी तरह की कमी नहीं है। रसोई गैस डीलर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने भी पुष्टि की है कि घरेलू गैस की डिलीवरी नियमित रूप से की जा रही है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।
सोशल मीडिया पर अफवाहों को लेकर चेतावनी
भोपाल पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं है। डीलर्स को ऑर्डर देने पर नियमित रूप से ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ विदेशी देशों में ईंधन संकट से जुड़े वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिससे लोगों में भ्रम फैल सकता है। ऐसे में प्रशासन को अफवाहों पर नजर रखने की जरूरत है।
मध्यप्रदेश में पेट्रोल-डीजल की खपत कितनी
पेट्रोलियम डीलर्स के अनुसार मध्यप्रदेश में हर साल लगभग: करीब 1200 मीट्रिक लीटर पेट्रोल और करीब 1600 मीट्रिक लीटर डीजल की खपत होती है। पेट्रोल और डीजल को कुछ हद तक स्टोर किया जा सकता है, लेकिन एलपीजी गैस के मामले में स्टॉक करना आसान नहीं होता। इसलिए गैस सप्लाई की निगरानी अधिक जरूरी मानी जाती है।
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