गुरुवार, 02 अप्रैल 2026
Logo
Madhaya Pradesh

मध्य प्रदेश में दवाएं महंगी, 300 फार्मा यूनिट्स पर संकट; मिडिल ईस्ट तनाव से सप्लाई टूटी, उत्पादन आधा

02 अप्रैल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में दवाएं महंगी, 300 फार्मा यूनिट्स पर संकट; मिडिल ईस्ट तनाव से सप्लाई टूटी, उत्पादन आधा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मिडिल ईस्ट के बढ़ते तनाव का असर अब सीधे आपकी जेब और सेहत पर पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में दवाओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और कई फैक्ट्रियां बंद होने के कगार पर हैं।


300 यूनिट्स पर असर, उत्पादन आधा

प्रदेश की करीब 300 फार्मा यूनिट्स में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं। जहां पहले तीन शिफ्ट में उत्पादन होता था, अब सिर्फ एक शिफ्ट में काम चल रहा है। इसका सीधा असर बाजार में दिख रहा है—दवाओं की उपलब्धता घट रही है और कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।


रोजमर्रा की दवाएं भी महंगी

सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ा है। पैरासिटामोल, एजिथ्रोमाइसिन, बीपी और शुगर की दवाओं के दाम तेजी से बढ़े हैं। उदाहरण के तौर पर, पैरासिटामोल की 100 गोलियां 26-28 रुपये से बढ़कर 45-46 रुपये हो गई हैं। वहीं एजिथ्रोमाइसिन की एक गोली 7 रुपये से बढ़कर 9-9.5 रुपये तक पहुंच गई है।


कच्चे माल के दाम 50% तक बढ़े

फार्मा कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे माल की लागत है। API और अन्य रॉ मटेरियल के दाम 30% से 50% तक बढ़ चुके हैं। इतना ही नहीं, महंगे होने के बावजूद पर्याप्त सप्लाई भी नहीं मिल रही, जिससे उत्पादन लगातार प्रभावित हो रहा है।


चीन से सप्लाई ठप, संकट गहरा

दवा उद्योग की रीढ़ माने जाने वाले कई केमिकल्स की सप्लाई चीन से आती है। लेकिन अब डाइक्लोफेनाक, पेनिसिलिन, एजिथ्रोमाइसिन जैसे जरूरी API की सप्लाई लगभग बंद हो गई है। पीथमपुर के उद्योगों के मुताबिक, सप्लाई चेन टूटने से कई यूनिट्स को मजबूरन उत्पादन सीमित करना पड़ रहा है।


पेट्रोकेमिकल की कमी ने बढ़ाई मुश्किल

संकट यहीं नहीं रुकता। दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रोपलीन ग्लाइकोल, एसीटोन और अन्य सॉल्वेंट्स की भी भारी कमी हो गई है। इनकी कीमतों में तेजी और उपलब्धता में कमी ने उत्पादन प्रक्रिया को और महंगा और जटिल बना दिया है।


इंजेक्शन कंपनियां भी मुश्किल में

इंजेक्शन बनाने वाली यूनिट्स भी इस संकट से अछूती नहीं हैं। एलपीजी गैस की अनियमित सप्लाई के कारण एम्पुल लॉकिंग प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। तेज तापमान की जरूरत वाली यह प्रक्रिया PNG गैस से संभव नहीं, जिसके चलते उत्पादन घटकर एक शिफ्ट तक सिमट गया है।


कीमत बढ़ाने की भी सीमा

इंडस्ट्री के सामने एक और चुनौती है—सरकारी नियम। डीपीसीओ नीति के तहत कंपनियां मनमाने दाम नहीं बढ़ा सकतीं। हालांकि 20-25% तक बढ़ोतरी की अनुमति मिली है, लेकिन बढ़ती लागत के मुकाबले यह राहत काफी नहीं मानी जा रही।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें