
भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर काम कर रहे हजारों अधिकारी और कर्मचारियों के लिए नई पदोन्नति प्रक्रिया बड़ा बदलाव लेकर आई है। मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद नियमित विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की कार्रवाई शुरू हो गई है।
नई व्यवस्था के तहत पात्रता की समीक्षा के बाद जो अधिकारी और कर्मचारी तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनसे कार्यवाहक प्रभार वापस लिया जाएगा और उन्हें उनके मूल पद पर पदस्थ किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय के स्तर पर इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
पांढुर्णा में हुई पहली बड़ी कार्रवाई
नई व्यवस्था का पहला बड़ा असर पांढुर्णा जिले में दिखाई दिया है। यहां पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में काम कर रहे 32 पुलिसकर्मियों का अतिरिक्त प्रभार समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश के बाद सभी संबंधित पुलिसकर्मी अब अपने मूल पद आरक्षक के रूप में ही सेवाएं देंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह निर्णय मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।
2016 से रुकी थी नियमित पदोन्नति
प्रदेश में वर्ष 2016 के बाद लंबे समय तक नियमित पदोन्नति प्रक्रिया नहीं हो सकी थी। इसी वजह से वर्ष 2021 से पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नियमित डीपीसी शुरू होने के साथ इन सभी मामलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
सेवा रिकॉर्ड बनेगा सबसे बड़ा आधार
नियमित पदोन्नति से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले 5 वर्षों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। समीक्षा में इन बिंदुओं को प्रमुख आधार बनाया गया है—
वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (SIR/ACR)
विभागीय दंड
निलंबन का रिकॉर्ड
अनुशासनात्मक कार्रवाई
न्यायालय में लंबित प्रकरण
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार जिनका सेवा रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होगा, उन्हें नियमित पदोन्नति का लाभ नहीं मिलेगा और कार्यवाहक प्रभार समाप्त कर दिया जाएगा।
करीब एक हजार कर्मचारी तुरंत हो सकते हैं प्रभावित
पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक समीक्षा में करीब 1,000 अधिकारी और कर्मचारी ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा असर पड़ सकता है। सूत्रों का कहना है कि अगले 4 से 5 दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। पूरी प्रक्रिया पूरी होने तक प्रभावित होने वालों की संख्या करीब 15 हजार तक पहुंच सकती है।
विभाग में बढ़ी अनिश्चितता
कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर काम कर रहे कर्मचारियों के बीच इस प्रक्रिया को लेकर चिंता बढ़ गई है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय तक ऊंचे पद की जिम्मेदारी निभाने के बाद मूल पद पर लौटने से मनोबल और कार्य प्रणाली प्रभावित हो सकती है। उधर विभाग का कहना है कि नियमित पदोन्नति पूरी तरह नियमों के अनुसार होगी और केवल पात्र अधिकारी एवं कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति का लाभ मिलेगा।
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