
भोपाल। मध्य प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग से जुड़ा एक नया आदेश सियासी बहस का मुद्दा बन गया है। अब प्रशिक्षण की शुरुआत रोज ‘श्री दक्षिणामूर्ति स्तोत्र’ से होगी, जिस पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई है।
क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश के पुलिस प्रशिक्षण केंद्रों में यह नया निर्देश जारी किया गया है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजा बाबू सिंह ने सभी पुलिस प्रशिक्षण स्कूलों (PTS) को आदेश दिया है कि हर दिन की शुरुआत स्तोत्र के पाठ से की जाए।
आदेश में क्या कहा गया है?
निर्देश के मुताबिक, प्रशिक्षण शुरू होने से पहले परिसर में लगे लाउडस्पीकर पर स्तोत्र बजाया जाएगा। साथ ही प्रशिक्षक और भर्ती दोनों इसे सुनेंगे और उसका पाठ भी करेंगे, ताकि दिन की शुरुआत एक तय अनुशासन के साथ हो।
एडीजी ने बताया—क्यों जरूरी है यह पहल
एडीजी का कहना है कि दक्षिणामूर्ति को ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है। उनके मुताबिक, एक पुलिस अधिकारी के लिए सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और नैतिक सोच भी जरूरी है—और यह पहल उसी दिशा में एक कदम है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे प्रयोग
यह पहली बार नहीं है जब पुलिस ट्रेनिंग में ऐसे प्रयास हुए हैं। पिछले साल प्रशिक्षण केंद्रों में भगवद गीता के अध्याय और उससे पहले रामचरितमानस के दोहे पढ़ने का सुझाव दिया गया था, जिससे करीब 4000 प्रशिक्षुओं पर सकारात्मक असर का दावा किया गया था।
कांग्रेस ने उठाए तटस्थता के सवाल
इस आदेश के बाद कांग्रेस ने आपत्ति जताई है। पार्टी के प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता का कहना है कि कानून लागू करने वाली संस्थाओं को पूरी तरह निष्पक्ष रहना चाहिए और किसी एक परंपरा को बढ़ावा देना सही नहीं है…
भाजपा का जवाब—यह संस्कृति, न कि सांप्रदायिकता
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इस फैसले का समर्थन किया है। पार्टी के प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे ग्रंथ ज्ञान, अनुशासन और कर्तव्य की सीख देते हैं, इन्हें सांप्रदायिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए…
पुलिस विभाग का पक्ष क्या है?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनिंग में पहले से योग, ध्यान और मानसिक अनुशासन शामिल हैं। उनके मुताबिक, यह पहल धार्मिक नहीं बल्कि नैतिक और मानसिक विकास से जुड़ी है।
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