
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में निगम-मंडल और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर चल रहा इंतजार फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। पार्टी से जुड़े नेताओं को अभी और धैर्य रखना पड़ेगा, क्योंकि नई राष्ट्रीय नेतृत्व व्यवस्था के बाद अब पूरी चयन प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया जा रहा है। संगठन के अंदरखाने से मिल रही जानकारी के मुताबिक, पहले भेजी गई नामों की सूची पर फिलहाल विराम लगा दिया गया है और अब नए सिरे से नाम मांगे गए हैं।
नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के बाद बदली रणनीति
पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के कार्यभार संभालने के बाद संगठन में कई अहम फैसलों की समीक्षा की जा रही है। इसी कड़ी में निगम-मंडल और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर भी प्रक्रिया रीसेट कर दी गई है। सूत्र बताते हैं कि राष्ट्रीय संगठन चाहता है कि प्रदेश से आने वाले नाम पूरी तरह नए मापदंडों और संतुलन के साथ भेजे जाएं।
दिल्ली दौरे से लौटे प्रदेश के बड़े नेता
हाल ही में दिल्ली से लौटे प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राष्ट्रीय नेतृत्व को प्रदेश की संगठनात्मक गतिविधियों और जमीनी हालात की जानकारी दी। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी दिल्ली प्रवास पर थे। माना जा रहा है कि हाईकमान अब सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नामों पर अंतिम फैसला लेगा, इसलिए जल्दबाजी से बचा जा रहा है।
बीएल संतोष से मुलाकात के सियासी मायने
निगम-मंडल नियुक्तियों की चर्चाओं के बीच राष्ट्रीय महामंत्री बीएल संतोष के मध्य प्रदेश दौरे को भी अहम माना जा रहा है। भोपाल एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, मध्यक्षेत्र बौद्धिक प्रमुख हितानंद और प्रदेश प्रभारी महेंद्र सिंह के साथ उनकी मुलाकात हुई। राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को संभावित नियुक्तियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
कब तक हो सकता है फैसला
हालांकि संगठन की ओर से कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि नामों की नई सूची आने के बाद राष्ट्रीय नेतृत्व स्तर पर गहन मंथन होगा। इसके बाद ही निगम-मंडल और अन्य राजनीतिक पदों पर नियुक्तियों का रास्ता साफ होगा। तब तक प्रदेश के कई नेता उम्मीद और इंतजार के बीच संतुलन बनाकर चलने को मजबूर हैं।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

