
भोपाल। मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। पोषण ट्रैकर ऐप के जरिए 50.36 लाख से अधिक बच्चों की रियल टाइम मॉनीटरिंग की जा रही है।
गर्भवती महिलाओं के बायोमेट्रिक सत्यापन में भी राज्य ने 99.99% का आंकड़ा हासिल किया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया के मुताबिक यह व्यवस्था मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाले ‘जन विश्वास अभियान’ के तहत पारदर्शिता और सेवा वितरण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
पोषण ट्रैकर से आंगनवाड़ी सेवाओं पर नजर
पोषण ट्रैकर ऐप के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों पर होने वाली रोजाना गतिविधियों का रिकॉर्ड और मॉनीटरिंग की जा रही है। इसमें पूरक पोषण आहार वितरण, बच्चों की ग्रोथ मॉनीटरिंग, गृह भेंट और सामुदायिक गतिविधियां शामिल हैं। रियल टाइम डेटा मिलने से SAM और MAM श्रेणी के बच्चों की पहचान की जा रही है। ऐसे बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्रों यानी NRC तथा विशेष स्वास्थ्य देखभाल से जोड़ने की प्रक्रिया में मदद मिल रही है।
FRS से लाभार्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन
महिला एवं बाल विकास विभाग ने लाभार्थियों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम (FRS) लागू किया है। फेस मैचिंग के जरिए अलग-अलग लाभार्थी श्रेणियों का सत्यापन किया जा रहा है। गर्भवती महिलाओं के वर्ग में कुल 4,54,951 पंजीकृत महिलाओं में से 99.99% का सत्यापन पूरा हो चुका है। 25 से अधिक जिलों ने इस श्रेणी में 100% लक्ष्य हासिल किया है। इन जिलों में अनूपपुर, बालाघाट, भोपाल, छिंदवाड़ा, दमोह, दतिया और देवास शामिल हैं।
धात्री माताओं और बच्चों का भी सत्यापन
धात्री माताओं की श्रेणी में 3,44,160 पंजीकृत माताओं में से 3,43,729, यानी 99.87% का बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा किया जा चुका है। इस श्रेणी में अनूपपुर, बुरहानपुर, सिवनी और उमरिया जिले प्रमुख प्रदर्शन करने वाले जिलों में रहे हैं। 6 महीने से 3 वर्ष आयु वर्ग के 25,38,587 पंजीकृत बच्चों में से 24,03,712 बच्चों, यानी 94.69% का सफल बायोमेट्रिक सत्यापन हो चुका है। इस श्रेणी में सिवनी और नीमच शीर्ष स्थान पर हैं।
मंत्री ने दिए सघन अभियान के निर्देश
मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने अधिक कुपोषण वाले क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए ऐसे इलाकों में समीक्षा बैठकें आयोजित कर सघन अभियान चलाने को कहा गया है। उन्होंने मैदानी अमले को शत-प्रतिशत गृह भ्रमण के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए हैं। मंत्री ने पोषण ट्रैकर को पारदर्शिता, सटीकता और जवाबदेही से जुड़ा माध्यम बताया है।
डिजिटल निगरानी से योजनाओं के वितरण पर फोकस
मंत्री के अनुसार पोषण ट्रैकर और FRS के इस्तेमाल का उद्देश्य पूरक पोषण आहार तथा स्वास्थ्य सेवाओं को वास्तविक लाभार्थियों तक समय पर पहुंचाना है। राज्य में रियल टाइम मॉनीटरिंग के जरिए सेवाओं की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। विभाग के आंकड़ों में बच्चों की निगरानी, गर्भवती महिलाओं के सत्यापन और अन्य लाभार्थी श्रेणियों में तकनीक आधारित मॉनीटरिंग की स्थिति सामने आई है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

