
भोपाल। अगर आप मध्य प्रदेश में घर या जमीन खरीदने की सोच रहे थे और टालते रहे — तो अब जेब पर सीधा असर पड़ेगा। 1 अप्रैल 2025 से प्रदेश की 65 हजार लोकेशन पर सरकारी गाइडलाइन दरें बढ़ा दी गई हैं। यानी रजिस्ट्री करानी है तो अब ज़्यादा रकम चुकानी होगी।
औसत बढ़ोतरी 16% — पिछले साल से भी ज़्यादा
पूरे प्रदेश में इस बार औसतन 16% की बढ़ोतरी की गई है, जो पिछले साल के 13% से काफी अधिक है। प्रदेश में कुल 1 लाख 5 हजार लोकेशन हैं, जिनमें से 28 हजार 396 लोकेशन पर फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया। बाकी सभी जगहों पर नई दरें आज से प्रभावी हो गई हैं। 26 मार्च को केंद्रीय मूल्यांकन कमेटी ने इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी और 1 अप्रैल की तारीख तय की गई। लेकिन इससे पहले ही बाजार में हलचल मच गई थी।
भोपाल में 31 मार्च को रजिस्ट्री की होड़
नई दरें लागू होने से पहले राजधानी भोपाल में 31 मार्च को खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी। सिर्फ एक दिन में 1,296 रजिस्ट्री हुईं, जिनसे सरकार को 32.35 करोड़ रुपये का राजस्व मिला। यह आंकड़ा खुद बताता है कि लोग पुरानी दरों पर जल्दी-जल्दी सौदे निपटाना चाह रहे थे। भोपाल में कुल 740 लोकेशन पर दरें बढ़ाई गई हैं — और कुछ इलाकों में तो उछाल देखकर आंखें चौड़ी हो जाएंगी।
भोपाल में 181% तक की बढ़ोतरी — ये इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित
राजधानी के भानपुर, कोलार रोड, मेंडोरा-मेंडोरी, अयोध्या बायपास और निशातपुरा रोड पर गाइडलाइन दरें 20% से लेकर 181% तक बढ़ाई गई हैं। यानी जिस जमीन की सरकारी कीमत कल तक 10 लाख थी, वो आज सीधे 28 लाख तक जा सकती है। भोपाल में तीन अलग-अलग बैठकों में कुल 63 दावे-आपत्तियां दर्ज की गई थीं। इनमें से 34 आंशिक रूप से मान्य, 4 पूरी तरह स्वीकार और 22 सिरे से खारिज कर दिए गए।
इंदौर में सबसे बड़ा झटका — 200% तक की छलांग
प्रदेश में सबसे ज़्यादा असर इंदौर पर पड़ा है। यहां 2,625 लोकेशन पर नई दरें लागू हुई हैं — जो किसी भी शहर में सबसे अधिक हैं। सामान्य क्षेत्रों में न्यूनतम 10% की बढ़ोतरी है, लेकिन जो इलाके सरकारी अधिग्रहण में आए हैं, वहां दरें 200% तक बढ़ाई गई हैं। इंदौर में रियल एस्टेट निवेशकों के लिए यह एक बड़ा बदलाव है — खासकर उन लोगों के लिए जो बाहरी इलाकों में सस्ती जमीन की तलाश में थे।
उज्जैन-ग्वालियर भी बेअसर नहीं
धार्मिक नगरी उज्जैन में 25 से अधिक लोकेशन पर 100 से 150% तक की बढ़ोतरी प्रस्तावित है। वहीं ग्वालियर में 22 से अधिक लोकेशन पर दरें 25 से 98% तक बढ़ाई जा रही हैं। छोटे शहर और कस्बे भी इस बदलाव से अछूते नहीं हैं — प्रदेशभर में यह बदलाव एक साथ लागू हो रहा है।
री-ट्रांसफर पर स्टाम्प ड्यूटी राहत की मांग — फैसला अभी बाकी
बिल्डरों के संगठन क्रेडाई ने एक अहम सुझाव रखा है — अगर कोई संपत्ति 3 साल के भीतर दोबारा बेची जाए, तो पहले चुकाई गई स्टाम्प ड्यूटी को नई रजिस्ट्री में समायोजित किया जाए। यह व्यवस्था महाराष्ट्र में पहले से लागू है।
फिलहाल मध्य प्रदेश में एक ही संपत्ति पर बार-बार पूरी स्टाम्प ड्यूटी देनी पड़ती है, जो निवेशकों के लिए भारी बोझ है। क्रेडाई का तर्क है कि इस राहत से बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रस्ताव अभी केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास विचाराधीन है — फैसला जो भी हो, उसका असर लाखों खरीदारों पर पड़ेगा।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

