
भोपाल। मध्य प्रदेश के राज्यसभा उपचुनाव में अब बैतूल के एक अतिथि शिक्षक ने भी अपनी दावेदारी पेश कर दी है। 55 वर्षीय हरिपाल बिहारे ने चुनाव लड़ने के लिए फॉर्म खरीद लिया है और अब उन्हें 10 विधायकों के हस्ताक्षर की जरूरत है।
भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अभी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। हरिपाल भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं से संपर्क कर रहे हैं।
60-70 भाजपा विधायकों के समर्थन का हरिपाल ने किया दावा
हरिपाल बिहारे का कहना है कि यदि 10 विधायक उनके नामांकन फॉर्म पर हस्ताक्षर कर देते हैं तो चुनाव में उनकी जीत तय है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि भाजपा के 60 से 70 विधायक उनके पक्ष में मतदान कर सकते हैं।
अपने दावे को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने बताया कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने उनका फॉर्म भरवाने का भरोसा दिलाया है। अब उनकी मुलाकात कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी से करने की तैयारी है।
भाजपा और कांग्रेस दोनों के कार्यालय पहुंचे हरिपाल
राज्यसभा चुनाव में समर्थन जुटाने के लिए हरिपाल दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यालयों का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने भाजपा और कांग्रेस के नेताओं से विधायकों के हस्ताक्षर दिलाने की मांग की है। उनके मुताबिक, अभी तक किसी भी दल की ओर से स्पष्ट सहमति नहीं मिली है। उमंग सिंघार से मिले आश्वासन के बाद अब वे जीतू पटवारी से भी चर्चा करना चाहते हैं।
जुलाई में नियमित शिक्षक की नियुक्ति के बाद चली गई नौकरी
हरिपाल बिहारे बैतूल जिले की आमला तहसील के सोमलापुर गांव के निवासी हैं। वे 2011 से अलग-अलग सरकारी स्कूलों में अतिथि शिक्षक के रूप में काम कर रहे थे। 2017 से वे पीएमश्री शासकीय हाईस्कूल बड़गांव में वर्ग-2 के अतिथि शिक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इसी साल जुलाई में स्कूल में नियमित शिक्षक की नियुक्ति होने के बाद उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं।
संस्कृत में एमए, परिवार में पत्नी और दो बच्चे
हरिपाल ने संस्कृत विषय में एमए किया है और वे अनुसूचित जाति से आते हैं। उनके परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटा और एक बेटी हैं। लंबे समय तक सरकारी स्कूलों में पढ़ाने के बाद नौकरी छूटने का मुद्दा अब उनके राज्यसभा चुनाव लड़ने के फैसले से जुड़ गया है।
अतिथि शिक्षकों की समस्याएं उठाने के लिए चुनाव लड़ने का फैसला
हरिपाल का कहना है कि अतिथि शिक्षक वर्षों से स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं।
उनके अनुसार, राज्यसभा में अक्सर दूसरे लोगों को भेजा जाता है। अनुभवी लोगों को भी उच्च सदन में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। अतिथि शिक्षकों की आवाज उठाने की मंशा से उन्होंने चुनाव में उतरने का फैसला किया है।
हरदीप सिंह पुरी की उम्मीदवारी पर भी उठाए सवाल
हरिपाल बिहारे ने भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी हरदीप सिंह पुरी को लेकर भी आपत्ति जताई है। उन्होंने पुरी के बारे में कुछ बातें सुनने का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा नहीं भेजा जाना चाहिए। हालांकि, अपने इन आरोपों के समर्थन में हरिपाल ने कोई प्रमाण पेश नहीं किया है।
10 विधायकों के हस्ताक्षर जुटाना सबसे बड़ी चुनौती
हरिपाल ने नामांकन फॉर्म खरीद लिया है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ने के लिए उन्हें 10 विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने होंगे। उनकी कोशिश भाजपा और कांग्रेस दोनों तरफ से समर्थन हासिल करने की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उन्हें जरूरी विधायकों का समर्थन मिल पाता है या उनकी राज्यसभा चुनाव लड़ने की योजना नामांकन से पहले ही अटक जाएगी।
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