
भोपाल। मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव अचानक दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। जहां संख्या बल के आधार पर मुकाबला लगभग तय माना जा रहा था, वहीं BJP ने तीसरी सीट पर महेश केवट को उम्मीदवार बनाकर राजनीतिक समीकरणों को नई दिशा दे दी है। सोमवार को कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन और BJP प्रत्याशी महेश केवट नामांकन दाखिल करेंगे। इसके साथ ही तीसरी सीट की लड़ाई पर सबकी नजरें टिक गई हैं।
BJP ने तीसरी सीट पर क्यों खेला बड़ा दांव?
मध्य प्रदेश से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होना है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के अनुसार दो सीटें BJP और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिखाई दे रही थीं। हालांकि BJP ने पहले दो सीटों के लिए तरुण चुग और रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार घोषित करने के बाद तीसरी सीट पर भी प्रत्याशी उतारकर मुकाबले को नया रंग दे दिया। पार्टी ने महेश केवट को मैदान में उतारकर साफ संकेत दिया है कि वह आखिरी सीट के लिए भी पूरी ताकत झोंकने के मूड में है।
कौन हैं महेश केवट?
महेश केवट बुंदेलखंड क्षेत्र के निवाड़ी जिले से आते हैं और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के केवट समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से जुड़े माने जाते हैं। इसी साल अप्रैल में राज्य सरकार ने उन्हें मध्य प्रदेश मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया था। अब राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनके राजनीतिक कद में उल्लेखनीय बढ़ोतरी मानी जा रही है। लेकिन उनकी राजनीतिक यात्रा का एक विवादित अध्याय भी रहा है, जो आगे कहानी को और रोचक बनाता है।
पहले निष्कासन, फिर वापसी और अब राज्यसभा का टिकट
महेश केवट पहले भी राजनीतिक चर्चाओं में रह चुके हैं। नगरीय निकाय चुनाव के दौरान उन पर BJP के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ प्रचार करने के आरोप लगे थे। इन आरोपों के बाद उन्हें अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आधार पर 6 साल के लिए निष्कासित किया गया था। हालांकि बाद में उन्होंने संगठन के साथ सक्रिय रूप से काम किया और धीरे-धीरे पार्टी नेतृत्व का भरोसा दोबारा हासिल कर लिया। अब राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में उनकी घोषणा को पार्टी में उनकी मजबूत वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन पर क्यों जताया भरोसा?
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव के लिए मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। सूत्रों के अनुसार दिग्विजय सिंह ने दोबारा राज्यसभा जाने की इच्छा नहीं जताई थी। इसके बाद कांग्रेस नेतृत्व ने मीनाक्षी नटराजन को मौका दिया, जिन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का करीबी और भरोसेमंद चेहरा माना जाता है। अब कांग्रेस की पूरी कोशिश अपने विधायकों को एकजुट रखकर सीट सुरक्षित करने की है।
क्या तीसरी सीट पर क्रॉस वोटिंग बनेगी गेम चेंजर?
राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब संभावित क्रॉस वोटिंग पर टिकी हुई है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस की एक सीट पर स्थिति मजबूत मानी जा रही है, लेकिन BJP द्वारा तीसरा उम्मीदवार उतारने के बाद अटकलों का दौर तेज हो गया है। यही वजह है कि दोनों दल अपने-अपने विधायकों को साधने और चुनावी रणनीति मजबूत करने में जुट गए हैं। अगर मतदान के दौरान कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम होता है, तो तीसरी सीट का परिणाम चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन सकता है।
आज नामांकन की आखिरी तारीख
राज्यसभा चुनाव के लिए 8 जून नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख है। आज मीनाक्षी नटराजन और महेश केवट अपना नामांकन भरेंगे।
फिलहाल संख्या बल कांग्रेस के पक्ष में दिखाई देता है, लेकिन BJP के इस अप्रत्याशित कदम ने चुनाव को औपचारिक प्रक्रिया से निकालकर सियासी मुकाबले में बदल दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि मतदान के दिन क्या कोई नया राजनीतिक समीकरण सामने आता है।
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