
भोपाल। सड़क हादसे MP में अब सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहे। हालात ऐसे हो गए हैं कि पैदल चलना भी जान जोखिम में डालने जैसा बन गया है। तेज रफ्तार गाड़ियां और कमजोर सड़क व्यवस्था मिलकर आम लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रही हैं।
3 साल में 5,393 मौतें, चौंकाने वाला आंकड़ा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में पिछले 3 सालों में 5,393 पैदल यात्रियों की सड़क हादसों में मौत हुई है। यह संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लगातार बिगड़ती सड़क सुरक्षा की तस्वीर दिखाती है। और भी चिंताजनक बात यह है कि देश में पैदल यात्रियों की कुल मौतों में प्रदेश की हिस्सेदारी 5.16% है।
हर साल बढ़ रहा मौतों का ग्राफ
आंकड़े बताते हैं कि स्थिति लगातार खराब हो रही है।
2022: 1,672 मौतें
2023: 1,793 मौतें
2024: 1,928 मौतें
यानी 2022 के मुकाबले 2024 में 15.31% की बढ़ोतरी हुई है। यह ट्रेंड साफ संकेत देता है कि समस्या गहराती जा रही है और अब तत्काल समाधान की जरूरत है।
देश में 8वें स्थान पर MP
पैदल यात्रियों की मौत के मामलों में मध्य प्रदेश देश में 8वें स्थान पर है। जबकि सबसे ज्यादा मौतें तमिलनाडु में दर्ज की गई हैं। यह रैंकिंग बताती है कि प्रदेश में सड़क सुरक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
596 ब्लैक स्पॉट बने खतरे का कारण
प्रदेश में कुल 596 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं—यानी ऐसे स्थान जहां दुर्घटनाएं बार-बार होती हैं। राष्ट्रीय राजमार्गों पर देशभर के 16,542 ब्लैक स्पॉट में से 3.6% हिस्सेदारी अकेले मध्य प्रदेश की है। इस मामले में राज्य 11वें स्थान पर आता है।
सुधार हुए, लेकिन खतरा अभी बरकरार
विभाग के अनुसार, 225 स्थानों पर स्थायी सुधार किए गए हैं, जबकि 590 जगहों पर अस्थायी सुधार किए गए हैं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सभी ब्लैक स्पॉट को पूरी तरह ठीक नहीं किया जाएगा, तब तक हादसों का खतरा खत्म नहीं होगा।
सरकार का दावा: नियमों का हो रहा पालन
केंद्र सरकार ने राज्यसभा में बताया कि सड़क निर्माण में सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया जा रहा है। पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए फुटपाथ, अंडरपास, फुटओवर ब्रिज और क्रॉसिंग जैसी सुविधाएं बनाई जा रही हैं। साथ ही रफ्तार नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रिप्स, स्पीड ब्रेकर और ऊंचे क्रॉसिंग जैसे उपाय अपनाए जा रहे हैं। हर प्रोजेक्ट में रोड सेफ्टी ऑडिट भी किया जाता है।
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