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MP Road Accidents Report: 18 महीने में 90 हजार से ज्यादा हादसे, 25,869 मौतों ने बढ़ाई चिंता

27 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Road Accidents Report: 18 महीने में 90 हजार से ज्यादा हादसे, 25,869 मौतों ने बढ़ाई चिंता
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं के लगातार बढ़ते आंकड़ों ने यात्री सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 से 7 जुलाई 2026 तक राज्य में 90,138 सड़क हादसे दर्ज किए गए।


इन दुर्घटनाओं में 25,869 लोगों की मौत हुई, जबकि 95,843 लोग घायल हुए। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में औसतन हर दिन करीब 47 लोगों की जान सड़क हादसों में जाती है और लगभग 166 लोग घायल होते हैं।


किन जिलों में सबसे ज्यादा सड़क हादसे

जिला स्तर के आंकड़ों में इंदौर सबसे आगे है। यहां 5,404 सड़क हादसों में 441 लोगों की मौत हुई और 4,443 लोग घायल हुए। दूसरी ओर जबलपुर में 5,333 दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, लेकिन यहां मृतकों की संख्या 993 रही, जो प्रमुख जिलों में सबसे अधिक है। भोपाल में 4,121 हादसों के दौरान 316 लोगों की जान गई।


कुछ जिलों में हादसे कम, लेकिन मौतों का अनुपात अधिक

रिपोर्ट के अनुसार भिंड में 1,169 सड़क दुर्घटनाओं के दौरान 1,287 लोगों की मौत दर्ज की गई। वहीं धार जिले में 3,426 हादसों में 1,017 लोगों की जान गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ग्रामीण और हाईवे क्षेत्रों में होने वाली दुर्घटनाएं अधिक घातक साबित हो रही हैं।


सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने की तैयारी

राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर नियंत्रण के लिए सरकार सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने की तैयारी कर रही है। इस सचिवालय में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागों को एक ही छत के नीचे काम कराया जाएगा। इसमें शामिल होंगे—

  • पीडब्ल्यूडी (PWD)

  • एनएचएआई (NHAI)

  • एमपीआरडीसी (MPRDC)

  • स्वास्थ्य विभाग

  • सड़क सुरक्षा से जुड़े अन्य विभाग


इस व्यवस्था की लीडिंग एजेंसी परिवहन विभाग होगा।


सबसे कम हादसे और सबसे कम मौत वाले जिले

रिपोर्ट के मुताबिक निवाड़ी में 296 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 91 लोगों की मौत हुई। वहीं पांढुर्णा में 295 सड़क हादसों के दौरान 153 लोगों की जान गई। जानकारों का कहना है कि छोटे जिलों में वाहनों की संख्या और यातायात का दबाव अपेक्षाकृत कम होने से दुर्घटनाओं के आंकड़े भी सीमित रहते हैं।


बड़े शहरों में हादसे ज्यादा, मौतें अपेक्षाकृत कम

आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि भोपाल और इंदौर में दुर्घटनाओं की संख्या अधिक होने के बावजूद मौतों का अनुपात अपेक्षाकृत कम है। इसके विपरीत जबलपुर, धार और सागर जैसे जिलों में दुर्घटनाओं की तुलना में मृत्यु दर अधिक दर्ज की गई है। यह स्थिति ग्रामीण सड़कों और हाईवे पर सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।

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