
भोपाल। मध्यप्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को कम करने के लिए तैयार रोड सेफ्टी एक्शन प्लान को अब प्राथमिकता के साथ लागू किया जाएगा। 55 जिलों के लिए तैयार इस योजना में दुर्घटना संभावित इलाकों से लेकर इमरजेंसी मेडिकल सहायता तक कई स्तरों पर काम किया जाना है।
सुप्रीम कोर्ट कमेटी द्वारा चयनित जीरो फैटेलिटी जिलों में सड़क हादसों में मृत्यु को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए ब्लैक स्पॉट, हाई एक्सीडेंट डेंसिटी कॉरिडोर और सड़कों के खतरनाक हिस्सों में सुधार के साथ यातायात नियमों के पालन पर भी जोर रहेगा।
9 जिलों में जीरो फैटेलिटी अभियान
कार्यक्रम के शुरुआती चरण में 6 जिलों को शामिल किया गया था। अब इसमें भोपाल, इंदौर और उज्जैन को जोड़कर जिलों की संख्या 9 कर दी गई है।
पहले से चयनित जिलों में शामिल हैं:
- धार
- सागर
- सतना
- रीवा
- जबलपुर
- खरगोन
इन जिलों का चयन पिछले 5 वर्षों के सड़क हादसों और मृत्यु दर से जुड़े आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण के आधार पर किया गया है।
ब्लैक स्पॉट और खतरनाक कॉरिडोर में सुधार
एक्शन प्लान में दुर्घटनाओं की अधिकता वाले इलाकों की पहचान के बाद वहां तकनीकी और इंजीनियरिंग कमियों को दूर करने की योजना है। ब्लैक स्पॉट को स्थायी तौर पर ठीक करने के साथ खतरनाक सड़क हिस्सों में भी सुधार किया जाएगा।
इंजीनियरिंग से जुड़े कामों में गड्ढों की मरम्मत, रम्बल स्ट्रिप्स और रोड स्टड्स लगाने तथा जंक्शनों को बेहतर बनाने के निर्देश शामिल हैं।
30 सितंबर तक गड्ढे भरने के निर्देश
बारिश के दौरान खराब हुई सड़कों की स्थिति को लेकर संबंधित विभागों को 30 सितंबर तक मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए हैं। पीडब्ल्यूडी ने सड़क सुधार के लिए अक्टूबर की समयसीमा निर्धारित की है।
रोड सेफ्टी प्लान में सड़क के गड्ढों और अन्य खतरनाक हिस्सों को समय पर ठीक करना महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है।
तीन साल में गड्ढों से जुड़े हादसों में सैकड़ों मौतें
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सड़क के गड्ढों से जुड़े हादसों में मौतों का आंकड़ा लगातार सामने आया है।
- 2021: 711 हादसे, 220 मौतें
- 2022: 759 हादसे, 199 मौतें
- 2023: 1,205 हादसे, 177 मौतें
2024 और 2025 में भी गड्ढों के कारण सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला जारी रहा। इसलिए रोड सेफ्टी योजना के सामने सड़क की खराब स्थिति को समय पर सुधारना बड़ी चुनौती रहेगी।
हेलमेट, सीट बेल्ट और अतिक्रमण पर कार्रवाई
योजना में सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों के प्रवर्तन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। हेलमेट और सीट बेल्ट के इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के साथ अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मवेशियों को हटाने पर भी जोर रहेगा, ताकि उनसे होने वाली दुर्घटनाओं का जोखिम कम किया जा सके।
दुर्घटना के बाद 'गोल्डन ऑवर' पर जोर
हादसा होने के बाद घायल व्यक्ति को जल्द चिकित्सा सहायता मिलना भी रोड सेफ्टी एक्शन प्लान का हिस्सा है। योजना में दुर्घटना के बाद के पहले घंटे यानी 'गोल्डन ऑवर' में त्वरित मेडिकल सहायता और कैशलेस इलाज सुनिश्चित करने की बात है। इसके लिए एंबुलेंस और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था को दुर्घटना के बाद तत्काल मदद से जोड़ा गया है।
आईआईटी मद्रास के प्रशिक्षित स्वयंसेवक बनेंगे 'सड़क सुरक्षा मित्र'
रोड सेफ्टी अभियान में प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की भी भूमिका तय की गई है। आईआईटी मद्रास से प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवकों को 'सड़क सुरक्षा मित्र' के रूप में तैनात किया जाएगा। इनका काम दुर्घटना की स्थिति में तत्काल सहायता पहुंचाने के साथ लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना होगा।
हर जिले में सेफ स्कूल जोन और मॉडल जंक्शन
सड़क सुरक्षा गतिविधियों की निगरानी के लिए 'मार्गदर्शक' डैशबोर्ड विकसित किया गया है। इसके जरिए सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों की निगरानी की जाएगी। भारतीय सड़क कांग्रेस के मानकों के अनुसार प्रत्येक जिले में 'सेफ स्कूल जोन' और 'मॉडल जंक्शन' विकसित करने के प्रस्ताव मुख्यालय भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं।
'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' का पायलट प्रोजेक्ट
वाहनों की बीमा पॉलिसी को अनिवार्य बनाने के लिए प्रदेश में 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' नाम से पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की संभावना भी बताई गई है। इस पहल को रोड सेफ्टी एक्शन प्लान में एक अन्य नवाचार के तौर पर शामिल किया गया है।
रोड सेफ्टी प्लान के प्रमुख काम
योजना में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कई स्तरों पर कार्रवाई प्रस्तावित है:
- हाई एक्सीडेंट डेंसिटी कॉरिडोर की पहचान और सुधार
- ब्लैक स्पॉट का स्थायी समाधान
- सड़कों के गड्ढों की मरम्मत
- रम्बल स्ट्रिप्स और रोड स्टड्स लगाना
- जंक्शनों का बेहतर विकास
- रोड साइन, मार्किंग और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था
- हेलमेट और सीट बेल्ट नियमों का पालन
- अवैध पार्किंग और अतिक्रमण हटाना
- बेसहारा मवेशियों को सड़कों से हटाना
- दुर्घटना के बाद त्वरित एंबुलेंस और चिकित्सा सहायता
- गोल्डन ऑवर में कैशलेस इलाज
- सड़क सुरक्षा मित्रों के जरिए तत्काल सहायता और जागरूकता
अब चुनौती अमल की
रोड सेफ्टी एक्शन प्लान के तहत मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में सड़क सुरक्षा से जुड़े कामों को प्राथमिकता देने की योजना है। जीरो फैटेलिटी के लिए चुने गए 9 जिलों में हादसों और मौतों को शून्य तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।
सड़क के गड्ढों से जुड़े पुराने हादसों के आंकड़े इस अभियान में समय पर मरम्मत की अहमियत को सामने रखते हैं। अब योजना के तहत तय किए गए इंजीनियरिंग, प्रवर्तन और इमरजेंसी केयर उपायों को जमीन पर लागू करना महत्वपूर्ण होगा।
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