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1 अप्रैल से MP के 92 हजार स्कूलों में उत्सव का माहौल — तिलक, फूलमाला और फ्री किताबें, CM खुद करेंगे 'स्कूल चलें हम' का आगाज़

31 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
1 अप्रैल से MP के 92 हजार स्कूलों में उत्सव का माहौल — तिलक, फूलमाला और फ्री किताबें, CM खुद करेंगे 'स्कूल चलें हम' का आगाज़
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से नए शिक्षण सत्र की शुरुआत किसी त्योहार से कम नहीं होगी। स्कूल का पहला दिन — तिलक, फूलमाला, फ्री किताबें और खास मध्याह्न भोजन। 'स्कूल चलें हम' अभियान के तहत 4 अप्रैल तक हर दिन कुछ नया होगा। और इस पूरे उत्सव की शुरुआत खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे।


85 लाख बच्चे, 92 हजार स्कूल — और एक बड़ा संकल्प

मध्यप्रदेश में करीब 92 हजार सरकारी स्कूल हैं — प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी तक। इनमें इस वक्त लगभग 85 लाख बच्चे पढ़ते हैं। लेकिन अभी भी कई बच्चे ऐसे हैं जो स्कूल से बाहर हैं। इसी को बदलने के लिए यह अभियान है। सभी जिलों के कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी हो चुके हैं। सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि भी स्कूलों में मौजूद रहेंगे।


1 अप्रैल: तिलक-माला से स्वागत, फ्री किताबें और बालसभा

पहले दिन का माहौल एकदम उत्सव जैसा होगा। नए दाखिल हुए बच्चों का तिलक लगाकर और फूलमालाओं से स्वागत किया जाएगा। कक्षा 1 से 8 तक सभी स्कूलों में बालसभा आयोजित होगी। हर छात्र को निशुल्क पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी और उस दिन विशेष मध्याह्न भोजन की व्यवस्था होगी। गाँव और बसाहट के जो बच्चे अभी तक स्कूल से बाहर हैं, उनका उसी दिन नामांकन कराया जाएगा।


2 अप्रैल: 'भविष्य से भेंट' — असली ज़िंदगी की प्रेरणा

दूसरे दिन स्कूलों में 'भविष्य से भेंट' कार्यक्रम होगा। खिलाड़ी, साहित्यकार, पुलिस अधिकारी, कलाकार और मीडिया से जुड़े दिग्गज बच्चों से रूबरू होंगे। ये मेहमान बच्चों को पढ़ाई का महत्व और जीवन की प्रेरक कहानियां सुनाएंगे। सामाजिक संस्थाएं और आमंत्रित अतिथि स्वेच्छा से बच्चों को उपयोगी सामग्री भेंट कर सकेंगे।


3 अप्रैल: खेल, संस्कृति और पालकों का सम्मान

तीसरे दिन स्कूलों में सांस्कृतिक कार्यक्रम और खेल-कूद का आयोजन होगा — और इस बार अभिभावक भी इसका हिस्सा होंगे। शिक्षक पालकों को सरकारी शिक्षा योजनाओं की जानकारी देंगे। साथ ही पिछले सत्र में 85% से ज़्यादा उपस्थिति रखने वाले बच्चों के अभिभावकों को सार्वजनिक सम्मान मिलेगा — यह छोटा कदम बड़े बदलाव की नींव है।


4 अप्रैल: जो फेल हुए, उन्हें नहीं छोड़ेंगे पीछे

अभियान के आखिरी दिन उन बच्चों पर ध्यान केंद्रित होगा जो किसी कारण कक्षोन्नति नहीं पा सके। अभिभावकों को समझाया जाएगा कि एक बार की असफलता अंत नहीं है। शाला प्रबंधन और विकास समिति की बैठक में उन बच्चों पर चर्चा होगी जो अभी तक नामांकित नहीं हैं। समिति सदस्य शत-प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य लेकर वार्षिक कार्ययोजना तैयार करेंगे।


एक कदम जो लाखों बच्चों की ज़िंदगी बदल सकता है

'स्कूल चलें हम' सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं — यह उन बच्चों के लिए एक उम्मीद है जो अभी तक किसी वजह से पढ़ाई से दूर रहे। 1 से 4 अप्रैल के ये चार दिन तय करेंगे कि इस सत्र में कितने और बच्चे स्कूल की दहलीज़ पार कर पाते हैं।

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