
भोपाल। मध्य प्रदेश में अब स्कूली बच्चों को सिर्फ किताबों की पढ़ाई नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के खतरों से बचने की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। बढ़ते साइबर फ्रॉड, सोशल मीडिया अपराध और ऑनलाइन गेमिंग के जोखिम को देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के हाई और हायर सेकंडरी स्कूलों में जल्द ही साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी नियमित कक्षाएं शुरू करने की तैयारी चल रही है। शुरुआत में यह व्यवस्था 500 स्कूलों में लागू होगी।
40 घंटे की होगी साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग
अभी तक चुनिंदा स्कूलों में साल में दो-तीन बार साइबर जागरूकता से जुड़े सेमिनार होते थे, लेकिन अब इसे नियमित पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की तैयारी है। स्कूल शिक्षा विभाग इसके लिए ड्राफ्ट तैयार कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार छात्रों को कम से कम 40 घंटे की साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस काम में मप्र राज्य ओपन बोर्ड की मदद ली जा रही है।
9वीं से 12वीं तक के छात्रों पर फोकस
यह नया सिलेबस खास तौर पर कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए तैयार किया जा रहा है। पढ़ाई पूरी होने के बाद छात्रों की परीक्षा भी ली जाएगी। हालांकि इस परीक्षा के अंक मुख्य रिजल्ट में नहीं जुड़ेंगे, लेकिन छात्रों को अलग से साइबर सिक्योरिटी सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इससे बच्चों में डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की कोशिश होगी।
क्या-क्या सिखाया जाएगा?
साइबर सिक्योरिटी क्लास में बच्चों को इंटरनेट का सुरक्षित इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा। इसके तहत सोशल मीडिया प्राइवेसी, फिशिंग लिंक, फेक ऐप्स और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड जैसे विषय शामिल होंगे। इसके अलावा छात्रों को UPI ठगी, साइबर बुलिंग और बैंकिंग फ्रॉड से बचने के तरीके भी बताए जाएंगे। विभाग का मानना है कि कम उम्र में डिजिटल जागरूकता बच्चों को बड़े नुकसान से बचा सकती है।
साइबर पुलिस भी करेगी मदद
स्कूलों में पढ़ाने के लिए विशेष इंस्ट्रक्टर नियुक्त किए जाएंगे। नियुक्ति से पहले इन प्रशिक्षकों को ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसमें साइबर पुलिस की मदद ली जाएगी। जहां स्मार्ट टीवी की सुविधा उपलब्ध है, वहां से इस कार्यक्रम की शुरुआत पहले की जाएगी। इसके साथ ही हर स्कूल में ‘साइबर सेफ्टी क्लब’ और ‘साइबर वॉरियर’ तैयार करने की योजना भी बनाई गई है।
सेफ क्लिक कैंपेन अब स्कूलों तक
मध्य प्रदेश पुलिस अभी भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत कई शहरों में ‘सेफ क्लिक’ अभियान चला रही है। अब इसी मॉडल को स्कूलों में भी लागू किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित व्यवहार सिखाना है, ताकि वे साइबर अपराधियों का आसान निशाना न बनें।
मॉडल स्कूलों में पहले से चल रहा प्रोग्राम
प्रदेश में फिलहाल एमपी बोर्ड के मॉडल स्कूलों में साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम संचालित किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन के मुताबिक पिछले करीब 5 साल से यह गतिविधियां नियमित रूप से कराई जा रही हैं। मॉडल स्कूल की प्राचार्य Rekha Sharma ने बताया कि सोशल मीडिया पर खासकर बच्चियां ज्यादा निशाने पर रहती हैं। इसलिए साइबर पुलिस और काउंसलर की मदद से बच्चों को लगातार जागरूक किया जाता है।
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