
इंदौर में सेमीकंडक्टर उद्योग को विस्तार देने के लिए आयोजित दो दिवसीय समिट में 5,800 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, इन प्रस्तावों से 10 हजार से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
24 अक्टूबर 2026 से ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में शुरू हुए इस आयोजन में चिप निर्माण, डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और उन्नत तकनीक से जुड़े निवेश पर चर्चा हो रही है। राज्य सरकार की योजना निवेश को औद्योगिक परियोजनाओं में बदलने और प्रदेश में तकनीकी क्षेत्र का आधार मजबूत करने की है।
5,800 करोड़ के प्रस्तावों से रोजगार पर नजर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समिट के दौरान मिले निवेश प्रस्तावों की जानकारी साझा की। उनके अनुसार, 5,800 करोड़ रुपये से ज्यादा के प्रस्ताव सामने आए हैं और इनके जरिए 10,000 से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है।
सरकार सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश आकर्षित करने के साथ तकनीकी बुनियादी ढांचे, अनुसंधान, नवाचार और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता पर भी ध्यान दे रही है।
50 से ज्यादा कंपनियां दिखा रहीं तकनीकी क्षमता
समिट की प्रदर्शनी में 50 से अधिक कंपनियां अपने उत्पादों, तकनीकी क्षमताओं और समाधानों को प्रस्तुत कर रही हैं। इनमें चिप डिजाइन, पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, उपकरण, सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और नई तकनीकों से जुड़े क्षेत्र शामिल हैं।
यह प्रदर्शनी कंपनियों, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों को सीधे बातचीत करने तथा संभावित कारोबारी सहयोग तलाशने का अवसर दे रही है।
दो दिन में होंगे 8 पैनल और 5 राउंडटेबल सत्र
मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 का कार्यक्रम उद्योग और तकनीक से जुड़े कई विषयों पर केंद्रित है। आयोजन के तहत 8 पैनल चर्चाएं, 5 राउंडटेबल बैठकें और 2 मुख्य व्याख्यान रखे गए हैं।
इन सत्रों में निवेश, तकनीकी सहयोग, अनुसंधान, औद्योगिक विकास और कुशल मानव संसाधन तैयार करने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। देश-विदेश की सेमीकंडक्टर कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निवेशक, शिक्षाविद, उद्योग विशेषज्ञ और स्टार्टअप प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हैं।
इंदौर-उज्जैन कॉरिडोर में हाई-टेक उद्योगों को प्राथमिकता
राज्य सरकार इंदौर-उज्जैन इकोनॉमिक कॉरिडोर में तकनीक आधारित उद्योगों के विकास पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस क्षेत्र में निम्न उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी:
- सेमीकंडक्टर विनिर्माण
- इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग
- एडवांस्ड पैकेजिंग
- चिप डिजाइन
- हाई-टेक उद्योग
इसके साथ प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और फोटोनिक्स एवं क्वांटम टेक्नोलॉजीज सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की योजना भी बताई गई है।
GIS 2027 में शामिल होने का न्योता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों और उद्यमियों के साथ चर्चा करते हुए उन्हें आगामी GIS 2027 में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। उनका कहना है कि मध्य प्रदेश अपनी प्रतिभाशाली कार्यशक्ति और मजबूत जनसांख्यिकीय लाभ के आधार पर निवेश तथा औद्योगिक विकास की संभावनाओं को आगे बढ़ा रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार भी इस क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने और प्राप्त प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के लिए प्रतिबद्ध है।
सेमीकंडक्टर क्षेत्र पर जोर क्यों दे रही सरकार?
चिप और सेमीकंडक्टर तकनीक आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स तथा उन्नत औद्योगिक प्रणालियों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस क्षेत्र में विनिर्माण, डिजाइन, टेस्टिंग और अनुसंधान से जुड़ी गतिविधियों का विस्तार प्रदेश में तकनीकी विशेषज्ञता विकसित करने के अवसर पैदा कर सकता है।
सरकार की पहल का उद्देश्य निवेश के साथ रोजगार और कुशल मानव संसाधन के अवसर बढ़ाना भी है। समिट के प्रस्ताव कितनी वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं, इससे मध्य प्रदेश में इस उद्योग के विस्तार की दिशा स्पष्ट होगी।
निवेश को जमीन पर उतारना होगी अहम चुनौती
मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर समिट-2026 में आए निवेश प्रस्ताव, कंपनियों की भागीदारी और प्रस्तावित तकनीकी केंद्र प्रदेश की औद्योगिक रणनीति के प्रमुख हिस्से हैं। अब इन प्रस्तावों को परियोजनाओं में बदलने, तकनीकी ढांचा विकसित करने और प्रशिक्षित कार्यबल तैयार करने पर आगे की प्रगति निर्भर करेगी।
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