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SIR विवाद पर MP में BJP का पलटवार, मोहन यादव ने राहुल गांधी से माफी और इस्तीफे की मांग की

28 सित, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
SIR विवाद पर MP में BJP का पलटवार, मोहन यादव ने राहुल गांधी से माफी और इस्तीफे की मांग की
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर मध्य प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। 27 सितंबर 2026 को भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर कांग्रेस के आरोपों पर जवाब दिया। 


भाजपा नेताओं ने SIR की प्रक्रिया को चुनावी व्यवस्था का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी से अपने बयानों को लेकर माफी मांगने और पद से इस्तीफा देने की मांग रखी। 


हेमंत खंडेलवाल ने SIR की प्रक्रिया पर क्या कहा?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण में दावे और आपत्तियां बुलाना चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा है। उनके मुताबिक इस प्रक्रिया को संचालित करने और दावे-आपत्तियां लेने का अधिकार चुनाव आयोग के पास है।


उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर चुनाव आयोग की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने का आरोप लगाया। खंडेलवाल ने कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों और दिए जा रहे बयानों की आलोचना भी की। 


मोहन यादव बोले- लोकतंत्र की जिम्मेदारी विपक्ष की भी

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने SIR के मुद्दे पर राहुल गांधी और कांग्रेस को निशाने पर लिया। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं होती, नेता प्रतिपक्ष की भी जिम्मेदारी होती है।


मोहन यादव ने चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर सवाल उठाने को लेकर आपत्ति जताई और कहा कि आयोग को लेकर भ्रम पैदा करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा चुनाव आयोग के साथ है। 


राहुल गांधी से माफी और इस्तीफे की मांग

मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी से SIR और चुनाव आयोग को लेकर दिए गए बयानों पर माफी मांगने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देने की मांग भी की। यह मांग रविवार को भोपाल में हुई भाजपा की प्रेस वार्ता के दौरान सामने आई। 


MP में SIR पर बढ़ी सियासी बयानबाजी

SIR को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रही बहस का असर मध्य प्रदेश की राजनीति में भी दिखाई दे रहा है। भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है, जबकि कांग्रेस की ओर से SIR और मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

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