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MP में हजारों अतिथि स्पेशल एजुकेटर हटेंगे, 31 मार्च तक ही सेवा, शिक्षा विभाग के आदेश से बड़ा झटका

30 मार्च, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP में हजारों अतिथि स्पेशल एजुकेटर हटेंगे, 31 मार्च तक ही सेवा, शिक्षा विभाग के आदेश से बड़ा झटका
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। हजारों अतिथि स्पेशल एजुकेटर की सेवाएं अचानक खत्म करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इससे न सिर्फ शिक्षकों बल्कि दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ सकता है।


31 मार्च तक ही सेवा, आदेश ने बढ़ाई चिंता

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि स्पेशल एजुकेटर के पद पर तैनात अतिथि शिक्षक अब सिर्फ 31 मार्च 2026 तक ही काम कर पाएंगे। इससे पहले उनकी सेवाएं 30 अप्रैल 2026 तक बढ़ाने का आदेश था, लेकिन उसे तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया। अचानक लिए गए इस फैसले से हजारों शिक्षकों में अनिश्चितता बढ़ गई है।


हजारों अतिथि शिक्षक प्रभावित, दिव्यांग बच्चों पर असर

प्रदेश में बड़ी संख्या में अतिथि शिक्षक स्पेशल एजुकेटर के रूप में काम कर रहे हैं। ये शिक्षक स्कूलों में दिव्यांग बच्चों को विशेष शिक्षा देते हैं। ऐसे में इनके हटने से शिक्षा व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा भी है।


केंद्र से निर्देश नहीं मिलने पर लिया गया फैसला

शिक्षा विभाग के आदेश के अनुसार, इस फैसले के पीछे मुख्य वजह केंद्र सरकार से दिशा-निर्देश का अभाव बताया गया है। जब तक शिक्षा अभियान को लेकर नई स्वीकृति नहीं मिलती, तब तक इन पदों पर सेवाएं जारी रखना संभव नहीं बताया गया—जिससे यह फैसला और भी विवादास्पद हो गया है।


जिम्मेदारी तय, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

आदेश में यह भी साफ किया गया है कि 31 मार्च के बाद अगर किसी स्कूल में स्पेशल एजुकेटर कार्यरत पाया गया, तो इसकी जिम्मेदारी सीधे संस्था के प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी की होगी। यानी प्रशासन अब इस फैसले को सख्ती से लागू करने के मूड में है—जिससे आगे और विवाद बढ़ने की संभावना है।


बतादें स्पेशल एजुकेटर की भूमिका सामान्य शिक्षकों से अलग होती है। वे खास तौर पर दिव्यांग बच्चों की जरूरतों के अनुसार पढ़ाई कराते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार इस फैसले पर पुनर्विचार करेगी या नहीं। अगर जल्द कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई, तो हजारों शिक्षकों की नौकरी और दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई दोनों पर संकट गहरा सकता है।

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