
भोपाल। मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू के संक्रमितों की संख्या 71 पहुंच गई है। वायरस के बदलते रूप और नए स्ट्रेन की पहचान के लिए जरूरी जीनोम सीक्वेंसिंग की सुविधा गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में अब तक शुरू नहीं हो सकी है।
कोरोना काल में वर्ष 2022 में नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने GMC को करीब 5 करोड़ रुपए की मशीन उपलब्ध कराई थी। मशीन स्टेट वायरोलॉजी लैब में रखी है, लेकिन अभी तक स्थापित नहीं हुई और एक भी सैंपल की जीनोम सीक्वेंसिंग नहीं हुई।
स्वाइन फ्लू के सैंपल भेजने पड़ रहे बाहर
GMC में सुविधा शुरू नहीं होने के कारण स्वाइन फ्लू समेत दूसरे वायरस के नमूनों की जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए उन्हें एम्स भोपाल या पुणे भेजना पड़ रहा है।
जीनोम सीक्वेंसिंग से वायरस के आनुवंशिक बदलावों की जानकारी मिलती है। इससे फैल रहे स्ट्रेन और उसमें हुए बदलावों को समझने में मदद मिलती है।
मशीन चलाने में सालाना 20 लाख का खर्च
मशीन के संचालन के लिए सिर्फ उपकरण उपलब्ध होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए रिएजेंट, कंज्यूमेबल, प्रशिक्षित कर्मचारियों और नियमित मेंटेनेंस की आवश्यकता होगी।
प्रबंधन के अनुसार मशीन चलाने पर सालाना करीब 20 लाख रुपए खर्च हो सकते हैं। एक साथ 90 सैंपल की जांच करने पर खर्च करीब 4 से 5 लाख रुपए तक पहुंच सकता है।
पर्याप्त सैंपल नहीं मिले तो बढ़ेगा खर्च
प्रबंधन का कहना है कि एक साथ पर्याप्त संख्या में सैंपल उपलब्ध नहीं होने पर जीनोम सीक्वेंसिंग की लागत ज्यादा पड़ सकती है।
मशीन को लगातार 72 घंटे चलाने के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति के साथ जीनोम डेटा का विश्लेषण करने वाले बायोइन्फॉर्मेटिक्स विशेषज्ञ भी जरूरी हैं।
वायरस के नए स्ट्रेन की निगरानी में अहम तकनीक
जीनोम सीक्वेंसिंग के जरिए वायरस के जेनेटिक बदलावों की पहचान की जाती है। इससे यह पता लगाने में सहायता मिलती है कि संक्रमण के लिए कौन सा स्ट्रेन जिम्मेदार है और उसमें किस तरह के बदलाव आए हैं।
यह प्रक्रिया महामारी की निगरानी और संक्रमण से निपटने की रणनीति तैयार करने में भी उपयोगी मानी जाती है।
GMC का दावा, जल्द शुरू होगी सुविधा
GMC की डीन डॉ. कविता एन सिंह के अनुसार मशीन की अथॉरिटी माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पास है और उपकरण स्टेट वायरोलॉजी लैब में रखा हुआ है।
उन्होंने बताया कि इसके संचालन में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) की मदद का प्रावधान है। रिएजेंट और कंज्यूमेबल की आपूर्ति में देरी के चलते प्रक्रिया अटकी हुई है। इस संबंध में विभागाध्यक्ष से चर्चा भी की गई है।
बुजुर्गों में गंभीर संक्रमण का खतरा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
भोपाल में 80 वर्षीय राम सिंह की H1N1 संक्रमण से मौत हुई। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें गंभीर रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम और एक्यूट रेस्पिरेटरी फेल्योर हुआ था।
राम सिंह पहले से हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित थे। उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
अस्पतालों को किया गया अलर्ट
सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए अस्पतालों को अलर्ट कर दिया गया है।
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