
भोपाल। जबलपुर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मध्यप्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के सेवा लाभ से जुड़ा मामला महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। कोर्ट ने सरकार को आदेश के पालन के लिए चार सप्ताह की मोहलत दी है।
मामले में पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने की मांग है। इसका असर शिक्षकों की सीनियरिटी, वेतन, पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर पड़ सकता है, जबकि करीब 10 साल के बकाया भुगतान का दावा भी सामने आया है।
सुप्रीम कोर्ट से SLP खारिज होने के बाद अवमानना याचिका
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के शिक्षकों के पक्ष में आए फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की SLP खारिज कर दी। इसके बाद हाईकोर्ट में आदेश का पालन कराने के लिए अवमानना याचिका दायर की गई। इसी याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार ने आदेश लागू करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा।
जस्टिस दीपक खोट की बेंच ने दिया चार सप्ताह का समय
अवमानना मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक खोट की सिंगल बेंच में हुई। सरकार की ओर से आदेश के अनुपालन के लिए समय मांगा गया, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया।
सरकार को 4 सप्ताह में आदेश का पालन करना है।
अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य पेश हुए।
सरकार की ओर से एएस बघेल ने पक्ष रखा।
2006 से वेतनमान का लाभ देने की मांग
शिक्षकों का कहना है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ 2016 से मिल रहा है। उनका तर्क है कि यदि पहली नियुक्ति से सेवा अवधि को मान्यता दी जाती है तो वेतनमान का लाभ भी 2006 से मिलना चाहिए। इस आधार पर करीब 10 साल के एरियर का मामला बन सकता है।
हर शिक्षक को 7 से 8 लाख रुपये मिलने का दावा
शिक्षकों के मुताबिक सेवा अवधि और वेतनमान से जुड़े लाभ लागू होने पर प्रत्येक शिक्षक को करीब 7–8 लाख रुपये तक मिल सकते हैं। इस बकाया पर 12% ब्याज दिए जाने की बात भी सामने आई है। इस व्यवस्था का असर मौजूदा वेतन पर भी पड़ सकता है। शिक्षकों के अनुसार मासिक वेतन में करीब 15–20 हजार रुपये तक का अंतर हो सकता है।
497 शिक्षकों से शुरू हुई थी कानूनी लड़ाई
इस मामले में राजेश पांडेय समेत 497 शिक्षकों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि शिक्षा विभाग में संविलियन के लिए 2018 से पहले की शिक्षकीय सेवा को मान्यता नहीं दी गई।
शिक्षकों ने पहली नियुक्ति से सेवा अवधि गिनने की मांग की थी। उनका कहना था कि इससे वरिष्ठता के साथ वेतन वृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी लाभ निर्धारित किए जा सकेंगे।
शिक्षक नेता बोले- अब आदेश लागू होना चाहिए
शिक्षक नेता उपेंद्र कौशल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मामला खारिज होने के बाद सरकार को हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
उनके मुताबिक शिक्षकों को उम्मीद है कि पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने के साथ लंबित सेवा लाभ भी मिलेंगे।
600 से ज्यादा आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति पर आभार
शिक्षक संगठनों ने 600 से ज्यादा दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के राज्य सरकार के फैसले पर भी सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग का आभार जताया है।
संगठनों के अनुसार इस निर्णय से प्रभावित परिवारों को रोजगार के साथ आर्थिक और सामाजिक सहारा मिल सकेगा।
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