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MP Transfer Policy 2026: मोहन कैबिनेट में आज नई तबादला नीति पर बड़ा फैसला संभव

20 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Transfer Policy 2026: मोहन कैबिनेट में आज नई तबादला नीति पर बड़ा फैसला संभव
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए आज बड़ा दिन हो सकता है। राज्य सरकार की नई तबादला नीति 2026 को मोहन कैबिनेट में मंजूरी मिलने की संभावना है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने इसका ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मंत्रियों की सहमति के बाद इस नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। नई व्यवस्था में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।


स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों के नियम बदलेंगे

नई नीति में सबसे बड़ा बदलाव स्वैच्छिक और प्रशासनिक तबादलों को लेकर किया जा सकता है। अब तक दोनों प्रकार के ट्रांसफर एक ही कोटे में शामिल किए जाते थे। सरकार का मानना है कि इससे जरूरी प्रशासनिक फेरबदल प्रभावित होते हैं। इसलिए अब दोनों के लिए अलग-अलग सीमा तय करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।


अभी क्या है तबादलों का नियम?

पुरानी व्यवस्था के तहत किसी विभाग में कुल कर्मचारियों के सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत तक तबादले किए जा सकते थे। इसी सीमा में स्वैच्छिक, आपसी और प्रशासनिक सभी प्रकार के ट्रांसफर शामिल होते थे। अधिकारियों का कहना है कि इससे कई बार जरूरी पदस्थापन समय पर नहीं हो पाते थे।


कुछ विभागों की अलग रहेगी नीति

स्कूल शिक्षा विभाग की तबादला नीति पहले की तरह अलग रहेगी। इसके अलावा जनजातीय कार्य, राजस्व और ऊर्जा विभाग भी अपनी जरूरत के मुताबिक अलग दिशा-निर्देश जारी कर सकेंगे। हालांकि इन विभागों को सरकार द्वारा तय मूल ढांचे के भीतर ही व्यवस्था बनानी होगी। यानी पूरी तरह अलग नियम लागू नहीं किए जा सकेंगे।


जिले स्तर पर बढ़ेंगे अधिकार

नई नीति के तहत तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के तबादलों में जिला स्तर पर अधिक अधिकार दिए जा सकते हैं। प्रभारी मंत्री और कलेक्टर इन कर्मचारियों के ट्रांसफर से जुड़े फैसले ले सकेंगे। वहीं प्रथम श्रेणी अधिकारियों के तबादलों के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी अनिवार्य रखी जाएगी।


कैबिनेट में इन प्रस्तावों पर भी होगी चर्चा

मोहन कैबिनेट की बैठक में सिर्फ तबादला नीति ही नहीं, बल्कि कई अन्य अहम प्रस्ताव भी रखे जाएंगे। इनमें जल निगम की बंडोल समूह जनपद योजना की पुनरीक्षित स्वीकृति, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को जारी रखने और लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं में मूल्य दर समायोजन जैसे मुद्दे शामिल हैं।

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