
भोपाल। सरकारी कर्मचारियों के तबादलों को लेकर मध्य प्रदेश सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है। अब केवल 3 साल की सेवा अवधि नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस भी पोस्टिंग और तबादले का सबसे अहम आधार बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को इस दिशा में नई नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि बेहतर काम करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वालों पर जल्द कार्रवाई हो। यही बदलाव आने वाले समय में पूरी तबादला व्यवस्था की तस्वीर बदल सकता है।
अच्छा प्रदर्शन करने वालों को मिलेगी बड़ी राहत मुख्यमंत्री ने सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिन शासकीय सेवकों का कामकाज बेहतर होगा, उन्हें 3 साल पूरा होने के बाद भी उसी स्थान पर कार्य करने का अवसर दिया जा सके। ऐसे मामलों में विभागाध्यक्ष अपने स्तर पर निर्णय ले सकेंगे। इसका उद्देश्य अनुभवी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को बिना वजह स्थानांतरित होने से बचाना है। वहीं दूसरी ओर कमजोर प्रदर्शन करने वालों के लिए सख्ती भी तय की गई है।
खराब काम करने वालों पर 6 महीने में कार्रवाई अब तक सामान्य तौर पर किसी कर्मचारी का तबादला 3 वर्ष की सेवा अवधि पूरी होने के बाद किया जाता था। लेकिन नई सोच के तहत यदि किसी कर्मचारी का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं पाया जाता है, तो सिर्फ 6 महीने के भीतर भी उसे हटाया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश सुशासन भवन में विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान दिए। इसी बैठक में आगामी निकाय चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा की गई।
अगले साल लागू हो सकती है नई तबादला नीति सरकार फिलहाल तबादलों के मौजूदा चरण में किसी बड़े बदलाव की संभावना कम मान रही है। अधिकारियों के अनुसार परफॉर्मेंस आधारित मानकों को अगले वर्ष की तबादला नीति में शामिल किया जाएगा। यानी आने वाली ट्रांसफर पॉलिसी पूरी तरह Performance Based Transfer Policy के रूप में तैयार किए जाने की दिशा में काम शुरू हो चुका है।
बैन हटा, फिर भी अधिकांश विभागों में नहीं हुए तबादले सरकार ने 13 दिन पहले तबादलों से प्रतिबंध हटाया था, लेकिन अब दोबारा प्रतिबंध लगने में केवल 3 दिन शेष हैं। इसके बावजूद करीब 90 फीसदी विभागों में एक भी तबादला नहीं किया गया। स्थिति यह भी है कि कई विभागों ने खाली पदों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड तक नहीं की, जबकि अंदरूनी स्तर पर तबादलों की सूची तैयार किए जाने की चर्चा है। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ रही है।
ऑनलाइन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने तबादलों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रणाली अपनाने की बात कही थी। लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों के लिए बनाया गया पोर्टल ही सही तरीके से काम नहीं कर रहा है। आवेदन नहीं हो पाने से कर्मचारी परेशान हैं और मंत्री कार्यालयों में भीड़ बढ़ रही है। विभाग ने इस मामले में एक प्रोग्रामर को हटाने की कार्रवाई भी की है।
स्वास्थ्य और जनजाति विभाग में आवेदन, लेकिन फैसला नहीं स्वास्थ्य विभाग ने ऑनलाइन आवेदन तो ले लिए हैं और बड़ी संख्या में कर्मचारी आवेदन कर चुके हैं, लेकिन अब तक तबादलों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। करीब यही स्थिति जनजाति कार्य विभाग में भी देखने को मिल रही है, जहां आवेदन तो जमा हो रहे हैं, लेकिन उनका निपटारा लंबित है।
मंत्रियों की नाराजगी भी पहुंची मुख्यमंत्री तक सूत्रों के मुताबिक नगरीय विकास एवं आवास विभाग में कुछ अधिकारियों के तबादले संबंधित मंत्रियों की जानकारी के बिना किए जाने की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची। इसके बाद मामले को विभागीय मंत्री के स्तर पर देखने के निर्देश दिए गए। इसी तरह एक जिले में पुलिस अधीक्षक द्वारा 17 पुलिस अधिकारियों के तबादले बिना आवश्यक सहमति के किए जाने की शिकायत भी मुख्यमंत्री तक पहुंची, जिसके बाद संबंधित अधिकारी को फटकार लगाए जाने की जानकारी सामने आई।
क्या बदल सकता है? यदि सरकार प्रस्तावित व्यवस्था को लागू करती है तो मध्य प्रदेश में तबादलों का आधार केवल सेवा अवधि नहीं रहेगा। काम की गुणवत्ता, जवाबदेही और प्रदर्शन भी कर्मचारियों की पोस्टिंग तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे बेहतर काम करने वालों को प्रोत्साहन मिलने और प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।
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