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मध्यप्रदेश के UCC में क्या-क्या बदलेगा? शादी, तलाक, संपत्ति और लिव-इन से जुड़े अहम नियम जानिए

22 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश के UCC में क्या-क्या बदलेगा? शादी, तलाक, संपत्ति और लिव-इन से जुड़े अहम नियम जानिए
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को "मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता, 2026" के ड्राफ्ट को पारित कर दिया। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।


सरकार के अनुसार यह संहिता संविधान में निहित समानता, लैंगिक न्याय, गरिमा और विधि के शासन के सिद्धांतों को प्रभावी बनाने की दिशा में तैयार की गई है। इसका विशेष फोकस महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को समाप्त करना है।


संविधान के अनुच्छेद 44 की भावना पर आधारित

प्रस्तावित संहिता संविधान के भाग-4 में वर्णित अनुच्छेद 44 की भावना के अनुरूप तैयार की गई है, जिसमें राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि यह कानून अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समेकित नागरिक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराएगा।


किन पर लागू नहीं होगा UCC

इस संहिता का दायरा सभी नागरिकों तक रहेगा, लेकिन कुछ वर्ग इससे बाहर रहेंगे। अनुच्छेद 342 और अनुच्छेद 366 (25) के तहत आने वाली अनुसूचित जनजातियां, जैसे भील, गोंड, कोरकू, बैगा, सहरिया और भारिया। संविधान के भाग XXI के तहत जिन समुदायों के पारंपरिक अधिकार सुरक्षित हैं।


अन्य राज्यों के अनुभव का भी अध्ययन

ड्राफ्ट तैयार करने के दौरान उत्तराखंड (2024), गुजरात (2026) और असम (2026) के यूनिफॉर्म सिविल कोड का अध्ययन किया गया।


विवाह और तलाक से जुड़े प्रमुख प्रावधान

  • प्रस्तावित संहिता में विवाह और विवाह-विच्छेद के लिए कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं।

  • केवल एक विवाह (मोनोगैमी) को मान्यता।

  • विवाह की न्यूनतम आयु: पुरुष 21 वर्ष, महिला 18 वर्ष।

  • प्रतिबंधित रिश्तों और अमान्य सहमति वाले विवाह पर रोक।

  • मौखिक तलाक और अनौपचारिक पंचायत के फैसले कानूनी रूप से मान्य नहीं होंगे।

  • तलाक केवल कानून में निर्धारित वैधानिक आधारों पर ही संभव होगा।

  • यदि पति ने विवाह के समय किसी अन्य महिला को गर्भवती किया था तो पत्नी विवाह निरस्त कराने की मांग कर सकेगी।


शादी और तलाक का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

  • प्रस्तावित कानून के तहत विवाह और तलाक दोनों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

  • शहरी क्षेत्रों में MP ई-नगर पालिका पोर्टल के माध्यम से।

  • ग्रामीण क्षेत्रों में SDM, नगरपालिका या पंचायत के जरिए।

  • रजिस्ट्रेशन न होने से विवाह अमान्य नहीं होगा, लेकिन आवेदन बिना लिखित कारण अस्वीकार करने पर रजिस्ट्रार पर दंड का प्रावधान रहेगा।


निकाह हलाला को लेकर प्रावधान

तलाक के बाद उसी जीवनसाथी से पुनर्विवाह के लिए निकाह हलाला जैसी शर्तों को लागू करना, बढ़ावा देना या इसके लिए मजबूर करना प्रस्तावित कानून में दंडनीय अपराध माना गया है।


बच्चों के अधिकारों में समानता

  • संहिता में बच्चों के अधिकारों को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं।

  • कानूनी ढांचे से 'अवैध' (Illegitimate) शब्द हटाया जाएगा।

  • विवाहित या अविवाहित माता-पिता की संतान, गोद लिए गए बच्चे, सरोगेसी और ART से जन्मे बच्चों को समान कानूनी दर्जा मिलेगा।

  • कस्टडी विवाद में अदालत का प्रमुख आधार बच्चे का सर्वोत्तम हित होगा।


उत्तराधिकार के नए नियम

  • संपत्ति के अधिकारों को जेंडर-न्यूट्रल बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

  • बेटा और बेटी दोनों को समान उत्तराधिकार अधिकार।

  • विधवा और विधुर के साथ समान व्यवहार।

  • माता और पिता दोनों को क्लास-1 उत्तराधिकारी का दर्जा।

  • बिना वसीयत की संपत्ति का वितरण क्लास-1, क्लास-2 और अन्य रिश्तेदारों के क्रम में होगा।

  • संपत्ति के मालिक की हत्या का दोषी व्यक्ति उत्तराधिकार से स्थायी रूप से अयोग्य होगा।

  • कानूनी वारिस न होने पर संपत्ति एस्चीट सिद्धांत के तहत राज्य को जाएगी।

  • स्वस्थ मानसिक स्थिति वाला वयस्क अपनी 100% स्वयं अर्जित और पैतृक संपत्ति वसीयत के माध्यम से किसी को भी दे सकेगा। प्रक्रिया भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम, 1925 के अनुसार होगी।


लिव-इन रिलेशनशिप के लिए भी नियम

  • प्रस्तावित UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी ढांचे में शामिल किया गया है।

  • साथ रहने के एक महीने के भीतर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण आवश्यक।

  • दोनों की न्यूनतम आयु 18 वर्ष।

  • पहले से विवाहित व्यक्ति लिव-इन के लिए पात्र नहीं होगा।

  • 21 वर्ष से कम आयु होने पर अभिभावकों को सूचना भेजी जाएगी और रिकॉर्ड स्थानीय पुलिस स्टेशन को भी उपलब्ध कराया जाएगा।

  • लिव-इन से जन्मी संतान को वैध माना जाएगा और उसे पूर्ण उत्तराधिकार मिलेगा।

  • महिला पार्टनर को छोड़े जाने की स्थिति में वह अदालत से भरण-पोषण की मांग कर सकेगी।


उल्लंघन पर दंड

  • लिव-इन से जुड़े नियमों के उल्लंघन पर अलग-अलग दंड प्रस्तावित किए गए हैं।

  • एक महीने से अधिक बिना पंजीकरण साथ रहने पर 3 महीने तक की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना।

  • गलत जानकारी देने पर 3 महीने तक की जेल और ₹25,000 जुर्माना।

  • नोटिस के बाद भी विवरण जमा नहीं करने पर 6 महीने तक की जेल और ₹25,000 जुर्माना।

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