
भोपाल। मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में बिजली वितरण व्यवस्था को भूमिगत करने की दिशा में काम शुरू होगा। केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय के निर्देश पर इन पांच शहरों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR 90 दिन में तैयार की जाएगी।
प्रस्ताव में 11 केवी और 400 वोल्ट की एलटी ओवरहेड लाइनों को भूमिगत केबल नेटवर्क में बदलने की योजना शामिल होगी। इसका मकसद बिजली आपूर्ति को ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
एक से ज्यादा रास्तों से पहुंचेगी बिजली
नई व्यवस्था में RMU यानी रिंगमेन यूनिट आधारित नेटवर्क प्रस्तावित है। इसका ढांचा इस तरह तैयार किया जाएगा कि किसी हिस्से में खराबी आने पर वैकल्पिक मार्ग से बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके।
इससे किसी एक लाइन या रास्ते पर निर्भरता घटेगी और फॉल्ट के बाद सप्लाई सामान्य करने में लगने वाला समय कम करने में मदद मिलेगी।
पेड़ गिरने और तार टूटने से होने वाले फॉल्ट घटेंगे
भूमिगत केबल व्यवस्था से आंधी-बारिश के दौरान पेड़ गिरने, बिजली के तार टूटने और खंभों के क्षतिग्रस्त होने जैसी वजहों से होने वाली दिक्कतों को कम करने का लक्ष्य है। इसके साथ शहरों में दिखाई देने वाला बिजली के खंभों और तारों का नेटवर्क भी कम होगा, जिससे शहरी स्वरूप में बदलाव आएगा।
हर बिजली संपत्ति का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड
परियोजना में GIS मैपिंग और एसेट टैगिंग को भी शामिल किया जाएगा। इसके तहत बिजली नेटवर्क में मौजूद उपकरणों और अन्य संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा।
इस रिकॉर्ड से किसी खराबी के समय संबंधित उपकरण और उसकी लोकेशन पहचानने में आसानी होगी। रखरखाव करने वाली टीमों को भी नेटवर्क में मौजूद उपकरणों की स्थिति की जानकारी उपलब्ध रहेगी।
नए कनेक्शन और नेटवर्क विस्तार में भी मदद
डिजिटल रिकॉर्ड का इस्तेमाल आगे बिजली नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने और नए कनेक्शन की योजना बनाने में किया जा सकेगा।
भविष्य में नेटवर्क के विस्तार की जरूरत होने पर भी संबंधित जानकारी डिजिटल सिस्टम से उपलब्ध रहेगी।
DPR में इन बिंदुओं का होगा अध्ययन
90 दिन में तैयार होने वाली DPR में सिर्फ मौजूदा तारों को जमीन के नीचे डालने का प्रस्ताव नहीं होगा। इसमें पांचों शहरों की मौजूदा और भविष्य की बिजली जरूरतों को भी देखा जाएगा।
DPR में मुख्य रूप से शामिल होंगे:
- मौजूदा बिजली नेटवर्क का आकलन
- भविष्य की बिजली मांग
- अधिक फॉल्ट वाले क्षेत्र
- नेटवर्क की मौजूदा जरूरतें
- भूमिगत केबल व्यवस्था
- RMU आधारित नेटवर्क
- GIS मैपिंग और एसेट टैगिंग
भविष्य की जरूरत के हिसाब से मजबूत होगा नेटवर्क
ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि बिजली वितरण नेटवर्क को आने वाले समय की जरूरतों के अनुरूप मजबूत करना आवश्यक है। भूमिगत केबल, आधुनिक स्विचिंग व्यवस्था और डिजिटल मैपिंग के जरिए उपभोक्ताओं को सुरक्षित और भरोसेमंद बिजली देने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा सचिव विशेष गढ़पाले के अनुसार परियोजना का लक्ष्य सिर्फ ओवरहेड तारों को हटाना नहीं है। नेटवर्क की नई व्यवस्था में कम फॉल्ट, तेज बिजली बहाली, बेहतर सुरक्षा और आसान रखरखाव को प्रमुख आधार बनाया जाएगा।
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