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मध्यप्रदेश में अब सीवेज का पानी बनेगा कमाई का जरिया, जानिए किन उद्योगों और संस्थानों को मिलेगा फायदा

26 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश में अब सीवेज का पानी बनेगा कमाई का जरिया, जानिए किन उद्योगों और संस्थानों को मिलेगा फायदा
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से निकलने वाले साफ पानी का व्यावसायिक इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी है। सरकार उद्योगों, रेलवे और निर्माण कार्यों के लिए यह पानी उपलब्ध कराकर भूजल और पेयजल की बचत करने के साथ नगरीय निकायों की आय बढ़ाना चाहती है।


इसके लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने यूज्ड वाटर पॉलिसी तैयार की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 28 अक्टूबर को इंदौर में होने वाले अर्बन कॉन्क्लेव में इसे जारी करेंगे।


उद्योगों और रेलवे को मिलेगा ट्रीटेड पानी

नई नीति के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी की बिक्री के लिए पहले उन उद्योगों और संस्थानों की पहचान की जाएगी, जिन्हें पीने के पानी के बजाय अन्य कामों के लिए बड़ी मात्रा में पानी चाहिए।


इस व्यवस्था में नगरीय निकाय निर्धारित दर पर पानी की आपूर्ति करेंगे। जरूरत के मुताबिक निजी निवेशकों की मदद से भी वितरण व्यवस्था विकसित की जाएगी।


शुरुआती चरण में इन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा:

* उद्योग: मशीनों और उपकरणों की धुलाई, कूलिंग सहित दूसरे काम।

* रेलवे: कोच और प्लेटफॉर्म की सफाई।

* निर्माण कार्य: निर्माण स्थलों पर पानी की जरूरत।

* सड़कें और उद्यान: मार्गों की धुलाई और गार्डनिंग।

* आवासीय सोसायटियां: फ्लश में इस्तेमाल के लिए पानी।


अभी प्रदेश के एसटीपी से उपचारित पानी का इस्तेमाल मुख्य रूप से गार्डनिंग में हो रहा है। नई नीति के जरिए इसे दूसरे गैर-पेयजल कार्यों तक पहुंचाने की योजना है।


घरों में सस्ते पानी की आपूर्ति की भी तैयारी

नीति के अगले चरण में घरों और आवासीय परिसरों के लिए अलग व्यवस्था विकसित करने की योजना है। इसके तहत फ्लश, गाड़ियों की धुलाई और गार्डनिंग जैसे कामों के लिए कम दरों पर ट्रीटेड पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा।


सरकार पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत टर्शियरी एसटीपी भी बनवाएगी। इन संयंत्रों में पानी को अधिक शुद्ध करने की व्यवस्था होगी, ताकि उसका इस्तेमाल निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप किया जा सके।


इन परियोजनाओं में निवेश करने वालों को सरकार की ओर से जमीन आवंटन, निवेश संबंधी छूट और प्रोत्साहन दिए जाएंगे। हालांकि, फूड इंडस्ट्री और फार्मा इंडस्ट्री को यह पानी उपलब्ध नहीं कराया जाएगा।


पेयजल और भूजल पर दबाव कम करना है लक्ष्य

वर्तमान में कई शहरों में औद्योगिक और अन्य जरूरतों के लिए भूजल या नगरीय निकायों से मिलने वाले पेयजल का उपयोग किया जाता है। इससे पीने योग्य पानी की खपत बढ़ती है और गर्मियों में जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है।


मालवा क्षेत्र में उद्योगों का विस्तार होने के साथ जलस्रोतों पर दबाव भी बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि जिन कामों में पेयजल की जरूरत नहीं है, वहां शोधित अपशिष्ट जल का इस्तेमाल बढ़ाया जाए।


नगरीय विकास एवं आवास विभाग के एसीएस संजय दुबे के मुताबिक, नीति के जरिए निजी निवेशकों की भागीदारी से एसटीपी के पानी को जरूरतमंद उद्यमों तक पहुंचाया जाएगा। इससे भूजल और पेयजल की बचत के साथ नगरीय निकायों की आमदनी बढ़ाने में मदद मिलेगी।


सागर में शुरू हुआ प्रयोग, निकाय को होने लगा फायदा

मध्यप्रदेश के सागर में एसटीपी के पानी की आपूर्ति उद्योगों और रेलवे को शुरू की जा चुकी है। इस प्रयोग से नगरीय निकाय की आय बढ़ी है।


सागर में मिले अनुभव के बाद विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों के लिए नीति तैयार की है। कुछ अन्य निकाय भी इसी तरह ट्रीटेड पानी के इस्तेमाल और आपूर्ति की दिशा में काम कर रहे हैं।


मध्यप्रदेश में रोज कितना सीवेज निकलता है?

मध्यप्रदेश में वर्तमान में प्रतिदिन 2,666 मिलियन लीटर सीवेज निकलता है, जबकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के जरिए रोजाना 1,639 MLD पानी का उपचार किया जा रहा है। प्रदेश में इस पानी के उपयोग की क्षमता 1,117 MLD प्रतिदिन है। उपचारित पानी और उपयोग क्षमता के बीच 522 MLD का अंतर है। यहां MLD का अर्थ मिलियन लीटर प्रतिदिन है।


MLD का अर्थ है मिलियन लीटर प्रतिदिन। 522 MLD का आंकड़ा उपचारित पानी और बताई गई उपयोग क्षमता के बीच का गणितीय अंतर है।


विभाग के अनुसार, अभी नालों को पूरी तरह एसटीपी से नहीं जोड़ा जा सका है। सीवेज लाइनों का विस्तार और नालों का डायवर्जन होने पर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचने वाले पानी की मात्रा बढ़ सकती है।


इस काम को आगे बढ़ाने के लिए नगरीय विकास विभाग अमृत 2.0, स्वच्छ भारत मिशन और अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के माध्यम से प्रयास कर रहा है।

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