
भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलेगा। पांच दिवसीय इस सत्र में सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पहला अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके अलावा कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर भी सदन में चर्चा होने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मानसून सत्र बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस बार का सत्र कई बड़े नीतिगत फैसलों की वजह से खास माना जा रहा है।
पहला अनुपूरक बजट होगा पेश
सरकार मानसून सत्र के दौरान वित्तीय वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट विधानसभा में प्रस्तुत करेगी। इसके जरिए विभिन्न विभागों के लिए अतिरिक्त वित्तीय प्रावधान किए जाएंगे। इसके साथ ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास और नगरीय विकास एवं आवास विभाग से जुड़े संशोधन विधेयक भी सदन में लाए जाएंगे।
48 लाख लोगों को मिलेगा बड़ा फायदा
सरकार स्वामित्व योजना के तहत 48 लाख से अधिक अधिकार पत्रधारकों को आवास या भूखंड की निश्शुल्क रजिस्ट्री का कानूनी आधार देने की तैयारी में है। इसके लिए मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम और मध्य प्रदेश उपकर अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित किए जाएंगे। यदि विधेयक पारित होता है तो लाखों हितग्राहियों को इसका सीधा लाभ मिल सकता है।
कई अहम विधेयक भी होंगे पेश
सरकार सिंहस्थ-2028 की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए मेला अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव भी ला सकती है। इसके अलावा छह श्रम कानूनों को एकीकृत करने वाला नया श्रम कानून और कोचिंग रेग्यूलेशन बिल भी मानसून सत्र के एजेंडे में शामिल हो सकते हैं।
UCC विधेयक पर रहेगी सबकी नजर
मानसून सत्र में सबसे ज्यादा चर्चा समान नागरिक संहिता (UCC) से जुड़े विधेयक को लेकर रहने की संभावना है। हालांकि सरकार ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं लिया है। फिलहाल जनसुनवाई की प्रक्रिया जारी है और 15 जून तक सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। आवश्यकता पड़ने पर सुझाव देने की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है।
अब तक मिले 2,500 ऑनलाइन सुझाव
सूत्रों के मुताबिक, सामान्य प्रशासन विभाग को अब तक करीब 2,500 ऑनलाइन सुझाव प्राप्त हो चुके हैं। इन सुझावों का अध्ययन करने के बाद समिति विधेयक का प्रारूप तैयार करेगी। इसके बाद वरिष्ठ सचिव समिति की समीक्षा और सरकार की मंजूरी मिलने पर ही विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने दिए गंभीर अध्ययन के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि UCC जैसे व्यापक प्रभाव वाले कानून पर पूरी गंभीरता से काम किया जाए। उन्होंने सभी कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक पहलुओं का गहन अध्ययन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि अंतिम मसौदा व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार हो सके।
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