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MP में दशहरे पर शस्त्र-पूजन की तैयारी, 20 अक्टूबर को इंदौर में पूजा करेंगे CM मोहन यादव

19 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP में दशहरे पर शस्त्र-पूजन की तैयारी, 20 अक्टूबर को इंदौर में पूजा करेंगे CM मोहन यादव
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में विजयादशमी के अवसर पर इस बार प्रदेश के विभिन्न जिलों में शस्त्र-पूजन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 अक्टूबर को इंदौर में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होकर शस्त्र-पूजन करेंगे।


राज्य सरकार ने जिलों में आयोजन की जिम्मेदारी तय कर दी है। कार्यक्रमों में मंत्रियों को मुख्य अतिथि बनाया गया है, जबकि संबंधित मंत्री की अनुपस्थिति में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक पूजा की जिम्मेदारी संभालेंगे।


जिलों में मंत्रियों को सौंपी गई कार्यक्रम की जिम्मेदारी

विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन के आयोजन के लिए राज्य शासन ने व्यवस्था निर्धारित की है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में होने वाले कार्यक्रमों के लिए मंत्रिपरिषद के सदस्यों को मुख्य अतिथि के रूप में नामांकित किया गया है।


निर्धारित जिलों में मंत्रिपरिषद सदस्यों और विधानसभा अध्यक्ष से संबंधित आदेश 19 अक्टूबर को, यानी कार्यक्रम से एक दिन पहले, जारी किए जाने की जानकारी इनपुट में दी गई है।


मंत्री नहीं पहुंचे तो कलेक्टर और एसपी करेंगे पूजन

सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था भी तय की है। जिन जिलों में संबंधित मंत्री शस्त्र-पूजन कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे, वहां जिला प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी आयोजन की जिम्मेदारी निभाएंगे।


- संबंधित जिले के कलेक्टर शस्त्र-पूजन करेंगे।

- जिले के पुलिस अधीक्षक भी इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।

- कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाएगा।


विजयादशमी पर शस्त्र-पूजन का क्या है महत्व?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शस्त्र-पूजन की भारतीय परंपरा को शक्ति, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण से जुड़ा बताया है। इस परंपरा का उद्देश्य शस्त्रों का इस्तेमाल आत्मरक्षा, धर्म की रक्षा और अन्याय के विरोध में करने का संकल्प लेना है।


उन्होंने भगवान श्रीराम से जुड़ी उस मान्यता का भी उल्लेख किया, जिसके अनुसार रावण का वध करने से पहले उन्होंने अस्त्र-शस्त्रों की पूजा की थी और इसके बाद विजय प्राप्त की थी।


सेना और सुरक्षा बलों की परंपरा से भी जुड़ा है आयोजन

मुख्यमंत्री के अनुसार, भारतीय सेना में शस्त्र-पूजन का संबंध देश की संस्कृति, शौर्य और राष्ट्र की रक्षा के संकल्प से है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों के लिए भी यह परंपरा वीरता तथा आत्मरक्षा के संकल्प को दर्शाती है।


शस्त्र-पूजन को देश की सैन्य क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था और स्वतंत्रता के प्रति सम्मान के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। विजयादशमी पर यह आयोजन बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देता है।

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