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मध्य प्रदेश में वायरल फीवर के रोज 3 हजार मरीज, डॉक्टरों ने पेनकिलर और एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल पर चेताया

21 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्य प्रदेश में वायरल फीवर के रोज 3 हजार मरीज, डॉक्टरों ने पेनकिलर और एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल पर चेताया
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में वायरल फीवर, खांसी और सर्दी-जुकाम के कारण रोजाना करीब 3,000 मरीज अस्पतालों की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने बिना सलाह पेनकिलर और एंटीबायोटिक लेने की बढ़ती आदत पर चिंता जताई है, क्योंकि इससे किडनी संबंधी परेशानी और इलाज में जटिलताएं सामने आ सकती हैं।


भोपाल, इंदौर और जबलपुर समेत कई शहरों में मरीजों की संख्या लगातार सामने आ रही है। डॉक्टरों के व्यक्तिगत अनुभव के अनुसार, कई मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही खुद दवाएं लेना शुरू कर देते हैं और बीमारी की असली वजह की जांच नहीं कराते।


भोपाल में सबसे ज्यादा मरीज, बड़े शहरों में भी बढ़ी परेशानी

वायरल फीवर और सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या को लेकर उपलब्ध अनुमान के मुताबिक, प्रदेश के प्रमुख शहरों में रोजाना इस तरह के मरीज अस्पतालों और क्लिनिकों में पहुंच रहे हैं।


भोपाल:                   600                    

इंदौर:                      500 

जबलपुर:                 500  

ग्वालियर:                 200 

उज्जैन:                   150 

मध्य प्रदेश में कुल अनुमान: 3,000  


भोपाल में जेपी अस्पताल, हमीदिया अस्पताल, जिला अस्पताल और निजी क्लिनिकों में सर्दी-जुकाम व वायरल फीवर के मरीज पहुंच रहे हैं। प्रदेश का कुल आंकड़ा अनुमानित है।


बुखार में खुद से एंटीबायोटिक लेना क्यों पड़ सकता है भारी?

वायरल संक्रमण में जल्द राहत पाने के लिए कुछ लोग डॉक्टर से सलाह लेने के बजाय पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेने लगते हैं। दवा से शुरुआती राहत मिलने पर वे कई बार उसे अपनी मर्जी से दोहराते रहते हैं।


दर्द निवारक दवाओं के कुछ प्रकार किडनी को प्रभावित कर सकते हैं। एंटीबायोटिक का अनावश्यक इस्तेमाल बैक्टीरिया में दवा के प्रति प्रतिरोध बढ़ा सकता है, जिससे भविष्य में कुछ संक्रमणों का उपचार मुश्किल हो सकता है।


केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भी NSAIDs यानी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं और एंटीबायोटिक्स के तर्कसंगत इस्तेमाल पर जोर दिया है।


डॉ. समन ताहिर का दावा: मेरे पास आने वाले 50% मरीज पहले ले चुके होते हैं दवा

एमबीबीएस, एमडी और एफआईसीडी डॉ. समन ताहिर के मुताबिक, उनके पास इलाज के लिए आने वाले करीब 50% मरीज डॉक्टर से परामर्श लेने से पहले ही दवाएं इस्तेमाल कर चुके होते हैं।


उनका कहना है कि गलत दवा चुनना, निर्धारित मात्रा से अलग डोज लेना या लंबे समय तक दवा जारी रखना स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है। उनके क्लिनिकल अनुभव में ऐसे मरीजों में लगभग 60–70% को किसी न किसी तरह की दवा संबंधी क्षति या जटिलता के साथ देखा गया है।


डॉ. ताहिर ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े उनके पास आने वाले मरीजों के व्यक्तिगत अनुभव पर आधारित हैं, किसी बड़े सर्वेक्षण के परिणाम नहीं हैं।


दवा की मात्रा और कितने समय तक उसका सेवन करना है, यह बीमारी, मेडिकल हिस्ट्री और किडनी की स्थिति को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए।


केस 1: सर्दी-जुकाम में दवा लेते रहे, 20 साल के युवक का क्रिएटिनिन बढ़ा

डॉ. समन ताहिर ने करीब 20 साल के एक युवक का उदाहरण दिया, जिसे सर्दी-जुकाम और शरीर में दर्द की शिकायत रहती थी। उसने डॉक्टर की सलाह के बिना NSAIDs श्रेणी की कुछ दर्द निवारक दवाएं और एंटीबायोटिक्स लेना शुरू कर दिया।


दवा लेने पर राहत मिलती रही, इसलिए युवक ने उनका इस्तेमाल जारी रखा। डॉक्टर के पास पहुंचने पर उसकी किडनी प्रोफाइल में गड़बड़ी और क्रिएटिनिन का बढ़ा हुआ स्तर सामने आया।


इसके बाद इलाज में किडनी की स्थिति को भी ध्यान में रखना पड़ा। डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि चिकित्सकीय जांच के बिना किडनी को हुए नुकसान के लिए किसी एक दवा को निश्चित रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।


केस 2: तीन महीने तक सिरदर्द की दवा ली, बीमारी गर्दन में निकली

ऑर्थो स्पाइन एंड स्पोर्ट्स इंजरी विशेषज्ञ डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना ने एक ऐसे मरीज का मामला साझा किया, जो गर्दन की नस पर दबाव के कारण होने वाले दर्द को सामान्य सिरदर्द समझ रहा था।


मरीज ने करीब तीन महीने तक दर्द की दवाएं लीं, लेकिन दर्द की वास्तविक वजह जानने के लिए जांच नहीं कराई। विशेषज्ञ से परामर्श लेने के बाद गर्दन की नस पर दबाव की समस्या सामने आई।


डॉ. सक्सेना के अनुसार, लगातार दवाएं लेने के दौरान मरीज का क्रिएटिनिन भी बढ़ा हुआ मिला और किडनी से जुड़ी परेशानी का पता चला। इसके बाद उपचार में गर्दन की मूल समस्या और मांसपेशियों को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।


डॉक्टर का कहना है कि बार-बार दर्द दबाने के बजाय उसके कारण की पहचान जरूरी है। हर सिरदर्द सामान्य नहीं होता और सभी मरीजों के लिए एक जैसी दवा उपयुक्त नहीं होती।


पेनकिलर से राहत मिल सकती है, लेकिन बीमारी खत्म होना जरूरी नहीं

डॉ. समन ताहिर के मुताबिक, दर्द के पीछे मांसपेशियों की समस्या, पोषण की कमी या कोई दूसरी बीमारी हो सकती है। पेनकिलर कुछ समय के लिए लक्षण कम कर सकती है, लेकिन जरूरी नहीं कि इससे दर्द का मूल कारण भी दूर हो जाए।


डॉ. प्रज्ञेश सक्सेना जरूरत के अनुसार वॉकिंग, एक्सरसाइज, मांसपेशियों को मजबूत करने और संतुलित खानपान पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। किस मरीज के लिए कौन-सी गतिविधि सही होगी, यह उसकी समस्या और शारीरिक स्थिति पर निर्भर करता है। लगातार दर्द रहने पर केवल दवा दोहराने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।


गूगल, रील या पुराने पर्चे के आधार पर दवा न लें

डॉक्टरों के मुताबिक, इंटरनेट पर उपलब्ध स्वास्थ्य संबंधी जानकारी शुरुआती समझ बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन उसके आधार पर खुद इलाज शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है।


दवा चुनते समय मरीज की मौजूदा बीमारी, मेडिकल हिस्ट्री, पहले से चल रही दवाओं और किडनी की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।


इन बातों का ध्यान रखें:

- डॉक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक शुरू न करें।

- पुराने पर्चे के आधार पर लंबे समय बाद दवा दोबारा न लें।

- किसी दूसरे व्यक्ति की दवा अपने लक्षणों के आधार पर इस्तेमाल न करें।

- दर्द लगातार बना रहे तो उसकी वजह जानने के लिए जांच कराएं।

- सोशल मीडिया पर बताई गई एक्सरसाइज या उपचार अपनाने से पहले अपनी स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ की सलाह लें।


वायरल फीवर या सर्दी-जुकाम में दवा की जरूरत हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। इसलिए जल्द राहत पाने के लिए खुद से दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना सुरक्षित विकल्प है।

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