मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026
Logo
Madhaya Pradesh

MP में करवा चौथ पर मौसम बिगाड़ सकता है व्रत का इंतजार, 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट; जानें आपके शहर का हाल

27 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP में करवा चौथ पर मौसम बिगाड़ सकता है व्रत का इंतजार, 12 जिलों में ऑरेंज अलर्ट; जानें आपके शहर का हाल
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। 29 अक्टूबर को मौसम प्रणाली का सबसे ज्यादा असर रहने का अनुमान है। मध्यप्रदेश के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी है, जबकि कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।


मौसम के इस बदले मिजाज का असर करवा चौथ पर भी पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, बारिश और बादलों के कारण 29 अक्टूबर को चांद के दर्शन मुश्किल हो सकते हैं।


12 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

अगले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के 12 जिलों में अति भारी बारिश की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में साढ़े 4 इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है।


ऑरेंज अलर्ट वाले जिले हैं:

* सतना, रीवा, मऊगंज और सीधी

* सिंगरौली, मैहर और उमरिया.

* शहडोल, अनूपपुर और डिंडौरी

* मंडला और बालाघाट


जबलपुर, छतरपुर, पन्ना, कटनी, दमोह, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में भी भारी बारिश होने का अनुमान है।


इन जिलों में बूंदाबांदी के आसार

प्रदेश के कई अन्य जिलों में हल्की बारिश हो सकती है। मौसम के इस असर का दायरा भोपाल से लेकर इंदौर, उज्जैन और ग्वालियर तक रहने का अनुमान है।


बूंदाबांदी की संभावना वाले जिले हैं:

* मध्य क्षेत्र: भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा।

* मालवा-निमाड़: इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास और रतलाम।

* ग्वालियर-चंबल: ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड और श्योपुर।

* अन्य जिले: सागर, टीकमगढ़ और निवाड़ी।


30 अक्टूबर को भी इन जिलों में बारिश का अनुमान

बारिश का असर अगले दिन भी जारी रह सकता है। 30 अक्टूबर को छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर और शहडोल में भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।


पचमढ़ी में रात का पारा 13 डिग्री

बारिश की चेतावनी के बीच प्रदेश में रातें ठंडी होने लगी हैं। प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में बीती रात न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिन के तापमान में भी करीब 1 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। उज्जैन, गुना, नर्मदापुरम, धार, ग्वालियर, इंदौर, खजुराहो और सागर में अधिकतम तापमान 35 से 35.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।


3 अक्टूबर को लौट चुका मानसून, फिर भी बारिश

मध्यप्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो गई थी। इसके बावजूद सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण प्रदेश में बारिश का सिलसिला जारी है।


पिछले एक सप्ताह में पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। कई इलाकों में लगातार 8 दिन तक तेज बारिश हुई। शनिवार, रविवार और सोमवार को बारिश थमी रही, लेकिन मंगलवार को फिर बारिश होने का अनुमान जताया गया।


मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला रुख दिखाई देता है। इस साल भी मौसम में इसी तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है।


अक्टूबर की शुरुआत में मौसम साफ होने और धूप निकलने के साथ रातें ठंडी रहीं, जबकि कई जिलों में बारिश भी हुई। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।


मध्यप्रदेश में सामान्य से 1.5 इंच कम बारिश

जून से सितंबर तक चले दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर (35.8 इंच) बारिश हुई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर (37.3 इंच) से करीब 1.5 इंच कम है।


बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के बीच अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% अधिक, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम बारिश दर्ज की गई। कुल मिलाकर प्रदेश में बारिश सामान्य से करीब 4% कम रही।


इन जिलों में बारिश का आंकड़ा कम

पूर्वी मध्यप्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से 4% अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम पानी गिरा।


पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में बारिश की कमी 9% से 51% के बीच रही।


जून में कम बारिश से बिगड़ा सीजन का औसत

मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति में सुधार आया, लेकिन मानसून दो बार कमजोर पड़ा और कई दिनों तक बारिश नहीं हुई।


सितंबर के आखिरी सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का कोटा पूरा रहा, लेकिन जून में कम पानी गिरने के कारण पूरे मानसून सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे रह गया।

पाठकों की राय (0)

इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

अपनी प्रतिक्रिया दें