
भोपाल। मानसून की विदाई के साथ मध्य प्रदेश में मौसम ने करवट लेना शुरू कर दिया है। रात के तापमान में तेजी से गिरावट आई है, जबकि दिन में तेज धूप के चलते गर्मी और उमस बनी हुई है। प्रदेश में 5 और 6 अक्टूबर को बारिश की संभावना नहीं है, लेकिन 7 और 8 अक्टूबर को पूर्वी हिस्से के कई जिलों में गरज-चमक, आंधी और हल्की बारिश हो सकती है।
तीन रात में 4 डिग्री तक गिरा पारा
रात के तापमान में सबसे ज्यादा बदलाव अमरकंटक और इंदौर जैसे इलाकों में नजर आया है। अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16°C और इंदौर में 18°C दर्ज हुआ है।
भोपाल, उज्जैन और पचमढ़ी में भी रातें पहले के मुकाबले ठंडी हुई हैं। इसके विपरीत दिन में धूप तेज होने से लोगों को गर्मी का अहसास हो रहा है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के अक्टूबर के आंकड़ों में बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह का मौसम देखने को मिलता रहा है। इस साल भी इसी तरह का मौसम बने रहने का अनुमान है।
5-6 अक्टूबर मौसम रहेगा साफ
अगले दो दिनों में प्रदेश में बारिश की गतिविधियां थमी रहेंगी। 5 और 6 अक्टूबर को कहीं भी बारिश का अनुमान नहीं है और दिन के समय धूप निकलने की संभावना है। इसके बाद मौसम में बदलाव दिखाई दे सकता है।
7-8 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने प्रदेश के पूर्वी हिस्से के लिए 7 और 8 अक्टूबर को अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
अलर्ट वाले जिले:
छतरपुर, पन्ना और सतना
रीवा, मऊगंज और सीधी
सिंगरौली, मैहर और उमरिया
शहडोल, अनूपपुर और डिंडौरी
मंडला और बालाघाट
100 दिन सक्रिय रहा मानसून
इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून ने मध्य प्रदेश में 100 दिन का सफर पूरा किया। 24 जून को प्रदेश में प्रवेश करने वाला मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया।
पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच पानी बरसा। सामान्य औसत 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच है। इस तरह सामान्य से 1.5 इंच और करीब 4% कम बारिश हुई।
पूर्वी हिस्से में ज्यादा, पश्चिम में कम बारिश
बारिश के आंकड़ों में प्रदेश के दोनों हिस्सों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा।
जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 4% अधिक रही। कई जिलों में कोटा पार हुआ, लेकिन कुछ जिलों में कमी बनी रही।
बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई।
पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज हुई।
25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो गया है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।
30 जिलों में सामान्य से कम बारिश
इस मानसून सीजन में 30 जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
जून की कमी से पिछड़ा मानसून का आंकड़ा
पूरे सीजन में बारिश का आंकड़ा कम रहने की बड़ी वजह जून की कमी रही। मौसम विभाग के अनुसार जून में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी।
जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश से स्थिति कुछ सुधरी, लेकिन बाद में मानसून में दो बार ब्रेक आया। कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं।
मानसून के आखिरी सप्ताह में मजबूत सिस्टम सक्रिय हुआ। इसके बावजूद बारिश का आंकड़ा 13% कम रहा। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का कोटा पूरा हो गया, लेकिन जून की कमी की भरपाई नहीं हो सकी।
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