
भोपाल। मध्य प्रदेश में अक्टूबर के तीसरे सप्ताह की शुरुआत बारिश और तेज हवाओं के साथ हो सकती है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, 15 से 17 अक्टूबर के बीच प्रदेश के 20 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।
मौसम में इस बदलाव की वजह उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और नया चक्रवाती तंत्र है। इसका प्रभाव अलग-अलग दिनों में ग्वालियर-चंबल, सागर, रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के क्षेत्रों में देखने को मिल सकता है।
20 जिलों में बारिश का अनुमान, जानिए किन इलाकों पर असर
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, बारिश की गतिविधियां तीन दिनों तक अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभाव डाल सकती हैं। 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल तथा सागर संभाग में बारिश की संभावना है।
17 अक्टूबर को इन मौसमी गतिविधियों का दायरा रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग तक पहुंचने का अनुमान है। इस दौरान कुछ इलाकों में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश हो सकती है।
इन 20 जिलों में मौसम बदलने की संभावना
मौसम विभाग के पूर्वानुमान में निम्न जिले शामिल हैं:
- ग्वालियर, भिंड, दतिया और शिवपुरी
- अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़
- पन्ना, सतना, रीवा और मऊगंज
- सीधी, मैहर और सिंगरौली
- शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट
भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के लिए अलर्ट जारी नहीं किया गया है।
मानसून लौटने के बाद अक्टूबर में क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से 3 अक्टूबर को मानसून की विदाई हो चुकी है। इसके बावजूद बारिश की संभावना बनने के पीछे सक्रिय मौसमी सिस्टम को प्रमुख वजह माना जा रहा है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, पिछले 10 वर्षों के रुझान में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और हल्की ठंड का मिला-जुला मौसम देखने को मिलता है।
इस साल भी दिन में धूप, रात में ठंडक और मौसमी सिस्टम सक्रिय होने पर कुछ क्षेत्रों में बारिश की स्थिति बनी हुई है। प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन तक सक्रिय रहा।
मध्य प्रदेश में सामान्य से 4% कम बारिश
जून से सितंबर तक के मानसूनी सीजन में राज्य में कुल 908.4 मिमी (35.8 इंच) बारिश दर्ज की गई। यह सामान्य औसत 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच यानी 4% कम है।
पूरे प्रदेश का औसत आंकड़ा एक जैसा नहीं रहा। पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के बीच बारिश के वितरण में अंतर दर्ज किया गया।
पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश का अंतर
- पूर्वी मध्य प्रदेश: जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसत से 4% अधिक बारिश हुई।
- पश्चिमी मध्य प्रदेश: इंदौर, उज्जैन और भोपाल सहित क्षेत्रों में सामान्य से 12% तक कम बारिश दर्ज की गई।
25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 जिले पीछे
जिलेवार आंकड़ों में भी बारिश का अंतर सामने आया है। भोपाल, ग्वालियर, गुना, छतरपुर और सतना समेत 25 जिलों में सामान्य या उससे अधिक वर्षा दर्ज की गई।
इसके उलट इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रायसेन, देवास और धार सहित 30 जिलों में बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी।
जून में सामान्य से 14% कम बारिश हुई थी। बाद के महीनों में हुई वर्षा इस कमी की भरपाई नहीं कर सकी। यही वजह है कि मानसून सीजन के अंत में प्रदेश की कुल बारिश सामान्य औसत से नीचे रही।
आगे मौसम पर रहेगी नजर
अक्टूबर में सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। 15 से 17 अक्टूबर के दौरान जिलेवार पूर्वानुमान के अनुसार मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
बारिश और तेज हवाओं की संभावना वाले क्षेत्रों में स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखना उपयोगी रहेगा।
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