
भोपाल। मध्य प्रदेश में जुलाई के दौरान पहली बार बारिश का ग्राफ सामान्य से नीचे पहुंच गया है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसत से 3% कम वर्षा दर्ज की गई है।
पिछले 5 दिनों से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश नहीं हुई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून को सक्रिय रखने वाली मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ने के कारण अधिकांश इलाकों में केवल बादल और हल्की फुहारों जैसी स्थिति बनी हुई है।
प्रदेश में अब तक कितनी बारिश हुई
मौसम केंद्र (IMD) भोपाल के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक 241.8 मिमी (9.5 इंच) बारिश रिकॉर्ड की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि में 250.1 मिमी (9.8 इंच) वर्षा होती है, यानी इस बार आंकड़ा 3% कम है। यह मानसून सीजन के कुल कोटे का लगभग 25% माना जा रहा है।
पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में बारिश की कमी
बारिश का असर प्रदेश के दोनों हिस्सों में दिखाई दे रहा है।
पूर्वी मध्य प्रदेश (जबलपुर, शहडोल, सागर और रीवा संभाग) में औसत से 17% कम बारिश।
पश्चिमी मध्य प्रदेश (भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल) में औसत से 10% कम वर्षा दर्ज की गई।
इसी वजह से प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में सामान्य से कम बारिश का रिकॉर्ड बना है।
मंगलवार को इन जिलों में हल्की बारिश के आसार
मौसम विभाग ने सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा में गरज-चमक और आंधी के साथ हल्की बारिश की संभावना जताई है।
इन जिलों में तेज धूप रहने का अनुमान
भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तेज धूप निकलने का पूर्वानुमान है।
मौसम विशेषज्ञ ने बताया बारिश क्यों थमी
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, मानसून को सक्रिय बनाए रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर हो गई हैं या उनका प्रभाव मध्य प्रदेश से दूर चला गया है। इसी कारण अधिकांश क्षेत्रों में केवल बादल छा रहे हैं और हल्की बूंदाबांदी जैसी स्थिति बनी हुई है।
कब फिर सक्रिय हो सकता है मानसून
विशेषज्ञों के मुताबिक उत्तर बंगाल की खाड़ी में एक नया ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) बनने की संभावना है। यदि यह आगे चलकर निम्न दाब क्षेत्र में बदलता है तो प्रदेश में दोबारा तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
मौसम विभाग का यह भी अनुमान है कि प्रशांत महासागर में 3 नए मौसम सिस्टम विकसित हो रहे हैं। इनमें से यदि कोई एक बंगाल की खाड़ी तक पहुंचता है तो मध्य प्रदेश में मानसून फिर से सक्रिय होने की संभावना बढ़ जाएगी।
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