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MP Weather Update: मध्य प्रदेश के 21 जिलों में बारिश का अलर्ट, अगले दो दिन आंधी चलने की भी संभावना

21 अक्टू, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Weather Update: मध्य प्रदेश के 21 जिलों में बारिश का अलर्ट, अगले दो दिन आंधी चलने की भी संभावना
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला थमा नहीं है। दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय होने से पश्चिमी और उत्तरी हिस्सों में पिछले पांच दिनों से आंधी-बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने बुधवार को 21 जिलों में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है।


दशहरे पर मंगलवार को रतलाम और महू समेत कई जगह बारिश ने रावण दहन की तैयारियों को प्रभावित किया। मौसम का यह मिजाज अगले दो दिन तक बने रहने का अनुमान है, जबकि प्रदेश में इस साल मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।


इन 21 जिलों में बारिश और तेज हवाओं का अनुमान

मौसम केंद्र के अनुसार, बुधवार को प्रदेश के पश्चिमी और मध्य हिस्सों के साथ कुछ दक्षिणी जिलों में भी बारिश हो सकती है। इस दौरान हवा की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है।


बारिश के पूर्वानुमान वाले जिले हैं:

- मालवा-निमाड़: इंदौर, उज्जैन, आगर-मालवा, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, आलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, धार।

- अन्य जिले: गुना, राजगढ़, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, शाजापुर, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा।


मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो दिनों तक प्रदेश में आंधी और बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं।


दशहरे पर बारिश से रावण दहन की तैयारियां प्रभावित

मंगलवार को रतलाम, महू सहित कई स्थानों पर बारिश हुई। पानी गिरने से कुछ जगह रावण के पुतले भीग गए, जबकि आयोजकों ने कुछ स्थानों पर पुतलों को बरसाती से ढंककर बचाने की कोशिश की।


दशहरे पर बारिश का असर इससे पहले 2022 में भी देखने को मिला था। उस साल भोपाल में रावण का पुतला बारिश में भीगने के कारण नहीं जल पाया था। बाद में पुतले पर केरोसिन और पेट्रोल डाला गया था। प्रदेश के दूसरे जिलों में भी बारिश के कारण रावण दहन के कार्यक्रम प्रभावित हुए थे।


रात में बढ़ी ठंडक, कई शहरों में पारा 20 डिग्री से नीचे

बारिश और बदलते मौसम का असर रात के तापमान पर भी दिखाई दे रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीती रात कई शहरों में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया।

पचमढ़ी           17.0°C         

करौंदी, कटनी     17.8°C         

मलाजखंड, बालाघाट 18.1°C         

छिंदवाड़ा        18.2°C         

ग्वालियर         18.3°C         


रात में ठंडक के बावजूद दिन के समय कुछ शहरों में गर्मी बनी हुई है। रतलाम, खरगोन, खंडवा, मंदसौर, उज्जैन और नर्मदापुरम में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रिकॉर्ड किया गया।


3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर भी जारी है बारिश

मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 3 अक्टूबर को ही हो गई थी। इस बार एक ही दिन में पूरे प्रदेश से मानसून लौट गया, लेकिन सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश का दौर जारी है।


पिछले एक सप्ताह से पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में आंधी-बारिश दर्ज की गई है। इनमें से कुछ इलाकों में पिछले पांच दिनों के दौरान तेज बारिश भी हुई है।


मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों तरह की परिस्थितियां देखने को मिली हैं। इस बार भी मौसम में यही बदलाव नजर आ रहा है।


अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने और धूप निकलने के साथ रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। इसके बावजूद कई जिलों में बारिश जारी है। इस साल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा।


मध्य प्रदेश में सामान्य से 1.5 इंच कम बारिश

जून से सितंबर तक चले मानसूनी सीजन में प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी 35.8 इंच बारिश हुई। यह सामान्य औसत 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच से करीब 1.5 इंच कम है।


मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से लगभग 4 प्रतिशत कम रही। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 4 प्रतिशत अधिक पानी गिरा, जबकि पश्चिमी हिस्से में बारिश की मात्रा सामान्य से 12 प्रतिशत कम रही।


पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश का हिसाब

जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग को मिलाकर पूर्वी हिस्से में औसत से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।


इन जिलों में 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई:

- बालाघाट

- छिंदवाड़ा

- दमोह

- जबलपुर

- नरसिंहपुर

- पांढुर्णा

- रीवा

- सागर

- सिवनी


पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में ज्यादा कमी

पश्चिमी हिस्से में बारिश की कमी अधिक रही। यहां सूचीबद्ध जिलों में सामान्य के मुकाबले 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।


इनमें आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं।


25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी

मानसून के पूरे सीजन के आंकड़ों में प्रदेश के 25 जिलों ने सामान्य बारिश का लक्ष्य पूरा कर लिया। इन जिलों में बारिश का कोटा पूरा होने की जानकारी मौसम विभाग के आंकड़ों में सामने आई है।


बारिश का कोटा पूरा करने वाले जिले:

भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।


इसके विपरीत 30 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।


जून में कम बारिश से बिगड़ा मानसून का औसत

इस साल जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश के कारण आंकड़ों में सुधार आया, लेकिन बाद में मानसून दो बार कमजोर पड़ा और कई दिनों तक बारिश नहीं हुई।


मानसून के आखिरी सप्ताह में एक बार फिर मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय हुआ। इसके बाद भी जून की कमी की भरपाई नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद जून में कम पानी गिरने का असर पूरे सीजन के आंकड़ों पर पड़ा।


इसी वजह से मध्य प्रदेश में मानसून के दौरान कुल बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम दर्ज की गई।

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