
भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम पूरी तरह शुष्क नहीं हुआ है। सक्रिय मौसमी सिस्टम के कारण रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में शनिवार को गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है, जबकि अगले 3 दिन प्रदेश में मौसम साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।
इस साल प्रदेश में जून से सितंबर तक औसतन 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य औसत से करीब 4% कम है। कुल 55 जिलों में से 25 में बारिश का कोटा पूरा हुआ, जबकि 30 जिले सामान्य से कम बारिश वाले रहे।
अमरकंटक में 37.5 मिमी बारिश, रातें हुईं ठंडी
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग में सक्रिय मौसमी सिस्टम का असर देखने को मिला है। बीते दिनों अमरकंटक में 37.5 मिमी यानी करीब डेढ़ इंच बारिश दर्ज की गई।
बारिश के बाद प्रदेश के कई इलाकों में रात के तापमान में गिरावट आई है। प्रमुख स्थानों पर न्यूनतम तापमान इस प्रकार दर्ज किया गया:
पचमढ़ी: 16.4°C
अमरकंटक और इंदौर: 17.9°C
छिंदवाड़ा: 18.1°C
कटनी (करौंदी): 18.8°C
शाजापुर: 19°C
दिन में गर्मी बरकरार, तालुन में पारा 37 डिग्री
रात के तापमान में गिरावट के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के समय गर्मी बनी हुई है। इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और नर्मदापुरम संभाग में अधिकतम तापमान 35°C से ऊपर दर्ज किया गया। बड़वानी जिले के तालुन में दिन का तापमान 37°C तक पहुंच गया, जो प्रदेश में दर्ज सबसे अधिक तापमान रहा।
3 अक्टूबर को विदा हुआ मानसून, फिर क्यों हो रही बारिश?
मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को पूरी तरह विदा हो गया था। इस साल प्रदेश में मानसून करीब 100 दिन सक्रिय रहा। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड तीनों तरह की मौसमी परिस्थितियां देखने को मिलती हैं। इस बार भी सक्रिय मानसूनी सिस्टम के प्रभाव से मानसून की विदाई के बाद बारिश हुई है।
जून की कम बारिश से बिगड़ा पूरे सीजन का हिसाब
जून से सितंबर तक चले मानसून सीजन में मध्य प्रदेश में औसतन 35.8 इंच (908.4 मिमी) वर्षा दर्ज की गई। इसके मुकाबले सामान्य बारिश का आंकड़ा 37.3 इंच है।
इस तरह पूरे सीजन में सामान्य से लगभग 4% कम बारिश हुई। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4% अधिक पानी गिरा, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत के मुकाबले 12% तक कम बारिश दर्ज की गई।
जून में 14% कम बारिश, बाद के महीनों में भी नहीं हुई पूरी भरपाई
बारिश के आंकड़ों में कमी की प्रमुख वजह जून का कमजोर प्रदर्शन रहा। उस महीने बारिश का कोटा सामान्य से 14% कम रहा था।
जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से इसकी भरपाई करने की कोशिश हुई, लेकिन शुरुआती कमी के कारण पूरे सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सका।
मध्य प्रदेश के 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा
प्रदेश के 55 जिलों में से 25 जिलों में सीजन के दौरान सामान्य बारिश का लक्ष्य पूरा हो गया। इन जिलों की सूची इस प्रकार है:
भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर।
इन 30 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के बाकी 30 जिलों में बारिश सामान्य स्तर से नीचे रही। इनमें प्रमुख जिले हैं:
मालवा और पश्चिमी क्षेत्र: इंदौर, उज्जैन, देवास, नीमच, मंदसौर और धार।
मध्य क्षेत्र: रायसेन, सीहोर और विदिशा।
अन्य प्रमुख जिले: जबलपुर, रीवा, सागर और छिंदवाड़ा।
इस तरह प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, जबकि पश्चिमी हिस्से में कमी अधिक दर्ज की गई।
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