
भोपाल। मध्य प्रदेश में बदले मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। हालिया बारिश और ओलावृष्टि ने 25 जिलों में फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद राज्य सरकार ने तुरंत सर्वे कर राहत राशि देने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए हैं।
मालवा-निमाड़ और ग्वालियर अंचल में सबसे ज्यादा असर
प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश के साथ चली आंधी ने खेतों में खड़ी फसलों को गिरा दिया। मालवा-निमाड़ और ग्वालियर संभाग के कुछ जिलों में हालात ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। करीब 63 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा ने गेहूं, चना और सरसों जैसी फसलों को नुकसान पहुंचाया। किसानों का कहना है कि कटाई से पहले हुई इस बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया है और अब उन्हें सरकारी मदद का इंतजार है।
सीएम के निर्देश: तुरंत सर्वे कर दिलाई जाए राहत
स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में फसल नुकसान का तेजी से सर्वे कराएं। सरकार का फोकस प्रभावित किसानों तक राहत राशि और फसल बीमा का लाभ जल्द पहुंचाने पर है। जनवरी महीने में भी मौसम के अचानक बदले मिजाज से किसानों को नुकसान हुआ था, इसलिए प्रशासन इस बार प्रक्रिया को तेज करने की बात कर रहा है।
SRF फंड से मदद, कुछ जिलों में राशि जारी
राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन के तहत राज्य राहत कोष (SRF) से राशि जारी करना शुरू कर दिया है। जिन जिलों में शुरुआती सर्वे पूरा हो चुका है, वहां राहत वितरण की प्रक्रिया भी शुरू होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों का दावा है कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा और बीमा क्लेम जल्द जारी किए जाएंगे, ताकि किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।
अधिकारियों की तैयारी पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारी से संपर्क करने पर स्पष्ट जानकारी न मिलने से किसानों और स्थानीय प्रतिनिधियों में नाराजगी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब राज्य सरकार 2026 को ‘कृषि वर्ष’ के रूप में आगे बढ़ा रही है, तब जमीनी स्तर पर तेज और संवेदनशील कार्रवाई बेहद जरूरी है।
क्यों बढ़ रही किसानों की चिंता?
लगातार बदलते मौसम पैटर्न ने किसानों के जोखिम को बढ़ा दिया है। बीते कुछ वर्षों में असमय बारिश और ओलावृष्टि की घटनाएं बढ़ी हैं, जिससे फसल उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था दोनों प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में समय पर सर्वे और पारदर्शी मुआवजा प्रक्रिया किसानों के लिए बेहद अहम हो जाती है।
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