
भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद मानसून की गतिविधियां फिर तेज होने के संकेत मिले हैं। सोमवार, 20 जुलाई को जारी मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन में 45 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है, जबकि कुछ जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
पिछले एक महीने से प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण असमान रहा। पूर्वी जिलों में अच्छी बारिश दर्ज हुई, जबकि भोपाल समेत पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्रों में अब भी सामान्य से कम वर्षा होने के कारण लोग अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।
इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग ने भिंड, मुरैना, अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर और टीकमगढ़ में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
पिछले 24 घंटे में यहां हुई सबसे ज्यादा बारिश
बीते 24 घंटे के दौरान सबसे अधिक असर पूर्वी मध्यप्रदेश में देखने को मिला।
बारिश के प्रमुख आंकड़े:
चनौड़ी (शहडोल): 122 मिमी
बिलहरी (कटनी): 85 मिमी
रामपुर बघेलान (सतना): 83 मिमी
स्लिमनाबाद: 70 मिमी
रामनगर (मैहर): 67 मिमी
शहडोल में अति भारी वर्षा दर्ज की गई, जबकि अनूपपुर, कटनी, सतना और मैहर में भारी बारिश रिकॉर्ड हुई।
किन इलाकों में अब भी कम बरसे बादल
पूर्वी मध्यप्रदेश इस समय मानसून की सबसे सक्रिय पट्टी में बना हुआ है। इसके उलट भोपाल, इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, बुरहानपुर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, मुरैना, भिंड और दतिया सहित पश्चिमी एवं उत्तर-पश्चिमी जिलों में बारिश बहुत कम या लगभग नगण्य रही।
भोपाल के मौसम पर क्या बोले विशेषज्ञ
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्व मौसम वैज्ञानिक शैलेन्द्र कुमार नायक के अनुसार, मौसम को केवल अधिकतम और न्यूनतम तापमान या दैनिक वर्षा से नहीं समझा जा सकता। 21 जून से 20 जुलाई 2026 तक भोपाल के मौसम का दैनिक विश्लेषण बताता है कि मानसून का आकलन बादलों, नमी, हवा, वायुदाब, दृश्यता, गरज-चमक और दिन-रात के दौरान होने वाले मौसमीय बदलावों को साथ लेकर करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि पिछले 30 दिनों तक अधिकांश समय भोपाल का आसमान बादलों से ढका रहा। यह संकेत है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आने वाली नम मानसूनी हवाओं का प्रभाव लगातार मध्य भारत तक बना रहा।
मौसम प्रणाली क्या संकेत दे रही है
20 जुलाई की सुबह के सिनॉप्टिक विश्लेषण के अनुसार मानसून द्रोणी श्रीगंगानगर से होकर उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के रास्ते उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय है।
इसके साथ:
पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इससे जुड़ी ऊपरी ट्रफ मध्य भारत होते हुए उत्तर-पूर्व अरब सागर तक फैली हुई है। यही प्रणाली बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मध्य भारत तक पहुंचा रही है।
दक्षिण-पश्चिम मध्यप्रदेश के ऊपर मौजूद ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण अब कमजोर पड़ चुका है, इसलिए पश्चिमी मध्यप्रदेश में वर्षा का विस्तार सीमित रहा।
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