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MP Wildlife Plan: चीतों के बाद अब जंगली कुत्तों की होगी वापसी, सोन चिरैया भी बसाई जाएगी

19 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
MP Wildlife Plan: चीतों के बाद अब जंगली कुत्तों की होगी वापसी, सोन चिरैया भी बसाई जाएगी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को नई रफ्तार मिलने जा रही है। चीतों की सफल पुनर्वास योजना के बाद अब राज्य सरकार जंगली कुत्तों (ढोल) और सोन चिरैया को भी जंगलों में बसाने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन विभाग की समीक्षा बैठक में इस दिशा में कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी।


आंध्र प्रदेश से आएंगे जंगली कुत्ते, बदले में MP देगा बाघ और गौर

वन विभाग की योजना के अनुसार वर्षों पहले बड़ी संख्या में पाए जाने वाले जंगली कुत्तों को आंध्र प्रदेश से मध्य प्रदेश लाया जाएगा। इसके बदले राज्य अपने बाघ और गौर उपलब्ध कराएगा। वहीं राजस्थान से सोन चिरैया लाकर घाटीगांव और गांधी सागर क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जिससे इन दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण हो सके।


गांधी सागर में बढ़ेगी चीतों की संख्या

चीता परियोजना का भी विस्तार किया जाएगा। पालपुर कूनो नेशनल पार्क से 2 और चीतों को गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे गांधी सागर को भी चीता संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है।


वन्यजीव सुरक्षा के लिए बनेंगे कंट्रोल रूम और रेस्क्यू सेंटर

वन अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए राज्य स्तरीय टॉस्क फोर्स गठित की जाएगी। इसके अलावा वन्यजीवों की निगरानी के लिए कमांड एंड कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना और अन्य प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों के आसपास वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि घायल या संकटग्रस्त वन्यजीवों का तत्काल उपचार किया जा सके।


जंगली हाथियों के बेहतर प्रबंधन पर भी फोकस

राज्य में बढ़ती जंगली हाथियों की गतिविधियों को देखते हुए सरकार उनके बेहतर प्रबंधन पर भी काम कर रही है। इसके लिए महावतों के पद बढ़ाए जाएंगे, जबकि वन अधिकारियों का एक दल प्रशिक्षण के लिए पश्चिम बंगाल भेजा गया है, ताकि हाथियों के प्रबंधन का अनुभव मध्य प्रदेश में भी लागू किया जा सके।


अनूपपुर और डिंडौरी में साल बोरर आपदा की पुष्टि

बैठक में वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव ने जानकारी दी कि अनूपपुर और डिंडौरी के जंगलों में साल बोरर आपदा की पुष्टि हुई है। यह संक्रमण लगभग 30 साल में एक बार आता है। इससे पहले 1997 में इसका असर देखा गया था। संक्रमित पेड़ों को हटाकर जंगलों को सुरक्षित रखने की कार्ययोजना बनाई गई है।


वन भूमि विवाद खत्म करने की तैयारी

राजस्व और वन विभाग के बीच लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों को समाप्त करने के लिए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। सरकार वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को अधिक अधिकार देकर ऐसे मामलों के त्वरित समाधान की दिशा में काम करेगी।


तेंदूपत्ता संग्राहकों को मिलेगा 710.71 करोड़ रुपये का बोनस

वन विभाग के अनुसार वर्ष 2026 में 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया गया। इसके बदले तेंदूपत्ता संग्राहकों को ₹710.71 करोड़ की बोनस राशि वितरित की जाएगी, जिससे लाखों वनाश्रित परिवारों को आर्थिक लाभ मिलेगा।


ये बड़े फैसले भी लिए गए

- 300 नए देवस्थानों का विकास किया जाएगा। पहले 1421 देवस्थान विकसित किए जा चुके हैं।

- खनिज परिवहन के लिए वन विभाग परिवहन अनुज्ञा शुल्क में वृद्धि की जाएगी।

- मानव-वन्यजीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने का प्रयास किया जाएगा।

- वन्यजीव संरक्षण, निगरानी और रेस्क्यू व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से मजबूत किया जाएगा।

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