
भोपाल। महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठने जा रहा है। 16 अप्रैल से संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा शुरू होगी—और इससे पहले CM मोहन यादव ने बड़ा संदेश दिया है।
CM की अपील: राजनीति से ऊपर उठकर करें समर्थन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पत्र लिखकर सभी जनप्रतिनिधियों और दलों से अपील की है कि वे इस कानून का खुलकर समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी पार्टी का नहीं, बल्कि माताओं-बहनों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है—इसलिए इसे राजनीति से ऊपर रखना जरूरी है।
संसद में 3 दिन चलेगी अहम चर्चा
16 अप्रैल 2026 से संसद में इस अधिनियम के पूर्ण क्रियान्वयन को लेकर 3 दिवसीय संयुक्त सत्र आयोजित किया जाएगा। इसे केवल एक विधायी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र को अधिक समावेशी और मजबूत बनाने का मौका माना जा रहा है।
महिलाओं की भागीदारी से बदलेगा लोकतंत्र
सरकार का मानना है कि देश की प्रगति के लिए महिलाओं को निर्णय लेने और नेतृत्व में समान अवसर मिलना जरूरी है। यह अधिनियम लागू होने के बाद 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है—जो राजनीति का चेहरा बदल सकता है।
मध्यप्रदेश बना महिला सशक्तिकरण का मॉडल
CM ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले से ही महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत किया है—जिसका असर जमीन पर साफ दिख रहा है।
करोड़ों महिलाओं को मिला सीधा आर्थिक लाभ
प्रदेश में अब तक 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं को करीब ₹55,000 करोड़ की राशि सीधे खातों में ट्रांसफर की गई है। इसके साथ ही स्व-सहायता समूहों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है—जो बदलाव की मजबूत नींव बना रही है।
सरकारी नौकरियों और पंचायतों में बढ़ी हिस्सेदारी
मध्यप्रदेश में महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 35% आरक्षण दिया जा रहा है। वहीं पंचायत राज संस्थाओं में 50% आरक्षण सुनिश्चित कर महिलाओं को नेतृत्व में आगे लाया गया है—जिससे जमीनी स्तर पर उनकी भूमिका मजबूत हुई है।
CM का आह्वान: “नारी शक्ति का गौरव बढ़ाएं”
अंत में CM मोहन यादव ने सभी से अपील की कि वे मिलकर महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को आगे बढ़ाएं। उन्होंने कहा—“आइए, नारी शक्ति का गौरव बढ़ाएं और लोकतंत्र को और मजबूत बनाएं”—अब नजर संसद की बहस पर टिकी है।
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