
भोपाल। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इसे महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। उनका कहना है कि यह कानून आने वाले समय में राजनीति और समाज दोनों को बदल देगा।
16 अप्रैल को बताया ऐतिहासिक दिन
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि 16 अप्रैल भारत के लोकतंत्र के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने इस दिन को महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
‘21वीं सदी का बड़ा फैसला’: सीएम
सीएम ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया है, जिसे 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में गिना जा सकता है। लोकसभा में इस पर चर्चा शुरू होना ही इस बात का संकेत है कि सरकार इसे लेकर गंभीर है।
महिलाओं को मिलेगा नेतृत्व का अवसर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम महिलाओं को सिर्फ प्रतिनिधित्व नहीं देगा, बल्कि उन्हें नेतृत्व के नए अवसर भी प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से निर्णय प्रक्रिया और मजबूत होगी।
‘नारी राष्ट्र की असली शक्ति’
सीएम मोहन यादव ने कहा कि नारी सिर्फ सृष्टि की जननी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की असली शक्ति है। उनके अनुसार, जब तक महिलाओं की भागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।
विकसित भारत की नींव में आधी आबादी
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत की कल्पना में आधी आबादी का योगदान सबसे अहम है। महिलाओं के संघर्ष, सामर्थ्य और सफलता को संवैधानिक पहचान देना ही इस अधिनियम का मूल उद्देश्य है।
क्यों अहम है यह कानून?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को महिलाओं के राजनीतिक और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह कानून महिलाओं के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है—और भारतीय लोकतंत्र को अधिक समावेशी बना सकता है।
पाठकों की राय (0)
इस खबर पर अभी कोई कमेंट नहीं है। पहले आप लिखें!

