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18 साल का इंतजार खत्म होने के करीब! विंध्य तक पहुंचने वाला है नर्मदा का पानी

08 जून, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
18 साल का इंतजार खत्म होने के करीब! विंध्य तक पहुंचने वाला है नर्मदा का पानी
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। विंध्य क्षेत्र तक नर्मदा का पानी पहुंचाने वाली बहुप्रतीक्षित परियोजना अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में बन रही देश की सबसे बड़ी जल सुरंग में अब केवल 108 मीटर खुदाई का काम बाकी है। अधिकारियों के अनुसार जून 2026 तक सुरंग का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है। इसके बाद पहली बार बरगी बांध का पानी रीवा, सतना, मैहर और पन्ना के खेतों तक पहुंचेगा, जिससे क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव आएगा।


18 साल बाद पूरा होने जा रहा बड़ा सपना

करीब 11.95 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का निर्माण वर्ष 2008 में शुरू हुआ था। लगभग 1500 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने में इंजीनियरों को कई तकनीकी और भूगर्भीय चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कभी संगमरमर की चट्टानें मिलीं तो कहीं चूना पत्थर और मिट्टी की परतों ने काम की रफ्तार धीमी कर दी। कई बार सुरंग खोदने वाली मशीनों के कटर टूट गए, जिन्हें बदलने में ही करीब 67 करोड़ रुपये खर्च हो गए।


मीथेन गैस ने रोका था काम

परियोजना के दौरान सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साल 2013 में सामने आई, जब सुरंग के भीतर मीथेन गैस का रिसाव होने लगा। सुरक्षा कारणों से करीब चार महीने तक काम पूरी तरह रोकना पड़ा। इतना ही नहीं, कठिन परिस्थितियों के चलते एक महंगी अमेरिकी मशीन भी बेकार हो गई थी। इसके बावजूद परियोजना को आगे बढ़ाया गया और अब यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।


जर्मन मशीन कर रही अंतिम खुदाई

वर्तमान में सुरंग के आखिरी हिस्से में जर्मन टनल बोरिंग मशीन (TBM) काम कर रही है। सुरंग का व्यास 10.14 मीटर है, जो लगभग तीन मंजिला इमारत की ऊंचाई के बराबर माना जाता है। अंदर अत्यधिक गर्मी और नमी के कारण कर्मचारी लगातार तीन घंटे से ज्यादा काम नहीं कर पाते हैं। इसी वजह से अंतिम चरण की खुदाई बेहद सावधानी और तकनीकी निगरानी में की जा रही है।


हर मिनट निकल रहा 32 हजार लीटर पानी

सुरंग के भीतर भूजल का बहाव लगातार बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हर मिनट करीब 32 हजार लीटर पानी बाहर निकाला जा रहा है। इसके लिए पांच डीवाटरिंग स्टेशन चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुरंग में 1420 किलो वजनी सीमेंट रिंग्स लगाई गई हैं, जिनकी अनुमानित उम्र 100 साल से अधिक बताई जाती है।


विंध्य के किसानों की बदलेगी किस्मत

परियोजना पूरी होने के बाद रीवा, सतना, मैहर और पन्ना जिलों की करीब 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा। इसके अलावा कटनी जिले के कई क्षेत्रों को पेयजल सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। लंबे समय से पानी की कमी और बारिश पर निर्भर खेती करने वाले किसानों के लिए यह परियोजना किसी वरदान से कम नहीं मानी जा रही।


क्यों खास है यह परियोजना?

- देश की सबसे बड़ी जल सुरंग

- लंबाई 11.95 किलोमीटर

- लागत लगभग 1500 करोड़ रुपये

- 1.85 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई लाभ

- रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी को फायदा


विंध्य क्षेत्र के लिए यह सिर्फ एक जल परियोजना नहीं, बल्कि खेती, पेयजल और आर्थिक विकास की नई उम्मीद बनकर उभर रही है। अगले साल इसके पूरा होते ही मध्य प्रदेश के जल प्रबंधन इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ सकता है।

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