
इंदौर से 9वें राष्ट्रीय पोषण माह की राज्य स्तरीय शुरुआत हुई है। ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ थीम पर चलने वाला यह अभियान 8 अक्टूबर तक चलेगा, जिसमें बच्चों, गर्भवती और धात्री महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य पर विशेष गतिविधियां होंगी।
महिला एवं बाल विकास मंत्री सु निर्मला भूरिया ने कहा कि पोषण की जिम्मेदारी केवल सरकार तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को परिवारों, जनप्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाओं से जोड़कर इसे व्यापक जनभागीदारी का अभियान बनाने की बात कही।
आंगनवाड़ी केंद्रों में समुदाय की भागीदारी बढ़ेगी
मंत्री सु भूरिया ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं से स्थानीय जरूरतों के अनुसार नए प्रयोग करने का आग्रह किया। सफल नवाचारों को सोशल मीडिया पर साझा करने की बात भी कही गई, ताकि अन्य आंगनवाड़ी केंद्र उनसे सीख सकें।
अभियान में अभिभावक, सरपंच, पार्षद, जनप्रतिनिधि, स्व-सहायता समूह और सामाजिक-सांस्कृतिक संस्थाएं आंगनवाड़ी की गतिविधियों से जोड़ी जाएंगी।
स्थानीय भोजन और पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगा बढ़ावा
पोषण माह में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध खाद्य सामग्री और पारंपरिक व्यंजनों को प्रोत्साहित किया जाएगा। गर्भवती व धात्री महिलाओं को पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और बच्चों की देखभाल के प्रति जागरूक करने पर भी काम होगा।
कुपोषण की रोकथाम अभियान का प्रमुख हिस्सा रहेगी। बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के साथ आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की सुविधाओं को लेकर भी विभाग ने प्रयास किए हैं।
आंगनवाड़ी भवन और कर्मचारियों से जुड़े काम भी आगे बढ़े
महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनवाड़ी भवनों की उपलब्धता बढ़ाने के प्रयास किए हैं। इसके साथ मिनी आंगनवाड़ियों को मुख्य आंगनवाड़ी में उन्नयन करने और कर्मचारियों की लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई।
मंत्री ने कहा कि स्वस्थ बच्चे प्रदेश और देश के भविष्य की आधारशिला हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप पोषण को सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी बनाने की आवश्यकता है।
चार संस्थाओं के साथ हुआ एमओयू
राष्ट्रीय पोषण माह के शुभारंभ कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को मजबूत करने के लिए चार संस्थाओं के साथ समझौता ज्ञापन किए गए।
इन संस्थाओं में शामिल हैं:
- अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन
- एम्स
- आईपीई ग्लोबल
- नई दिशा फाउंडेशन
इन समझौतों के जरिए बच्चों के पोषण एवं स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और आंगनवाड़ी केंद्रों की गतिविधियों को बेहतर बनाने के लिए सहयोग किया जाएगा।
पोषण को सिर्फ भोजन तक सीमित न रखने की अपील
राज्यसभा सांसद डॉ. कविता पाटीदार ने कहा कि बच्चों और माताओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने के साथ भोजन की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक पोषण का मतलब केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उसमें मौजूद पोषक तत्वों को भी समझना है। उन्होंने पोषण ट्रैकर, वन स्टॉप सेंटर और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई। कार्यक्रम में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और सांसद शंकर लालवानी भी मौजूद रहे।
पोषण मेले में दिखे स्थानीय खाद्य पदार्थ
लता मंगेशकर सभागृह परिसर में आयोजित पोषण मेला और रेसिपी प्रदर्शनी में स्थानीय खाद्य सामग्री से तैयार पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शित किए गए।
प्रदर्शनी में टेक होम राशन (THR), गर्म पका भोजन (HCM), स्थानीय दालें, चना, मूंगफली, सोया, दूध एवं दुग्ध उत्पाद, मिलेट्स और मौसमी सब्जियों से बने व्यंजन शामिल रहे।
‘नो योर प्रोटीन—अपने प्रोटीन को पहचानें’ अभियान के माध्यम से परिवारों को स्थानीय प्रोटीन स्रोतों और संतुलित आहार की जानकारी दी गई।
3 से 6 साल के बच्चों के भोजन पर भी निगरानी
अभियान के दौरान आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए स्थानीय और विविधतापूर्ण ताजा नाश्ता तथा गर्म पका भोजन उपलब्ध कराया जाएगा।
भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता की निगरानी में समुदाय की भागीदारी रखी जाएगी। इसके लिए केंद्रों पर साप्ताहिक मेन्यू बोर्ड लगाए जाएंगे, जिससे अभिभावक और स्थानीय लोग बच्चों को मिलने वाले भोजन की जानकारी देख सकेंगे।
बच्चों की शारीरिक माप से लेकर मातृ वंदना योजना तक गतिविधियां
8 अक्टूबर तक चलने वाले अभियान में बच्चों की शारीरिक माप, पोषण जागरूकता और रेसिपी प्रदर्शन जैसी गतिविधियां होंगी।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र महिलाओं तक पहुंचाने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसका उद्देश्य पोषण और बाल विकास से जुड़े कार्यक्रमों में परिवार तथा समुदाय की सक्रिय भागीदारी बढ़ाना है।
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