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डबरा में इतिहास रचने जा रहा नवग्रह शक्तिपीठ: 10–20 फरवरी तक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव, ग्रह देव पत्नियों संग होंगे विराजमान

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डबरा में इतिहास रचने जा रहा नवग्रह शक्तिपीठ: 10–20 फरवरी तक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव, ग्रह देव पत्नियों संग होंगे विराजमान

डबरा में इतिहास रचने जा रहा नवग्रह शक्तिपीठ: 10–20 फरवरी तक प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव, ग्रह देव पत्नियों संग होंगे विराजमान

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

डबरा। मध्यप्रदेश का डबरा अब आस्था, परंपरा और भव्यता के संगम का नया केंद्र बनने जा रहा है। विश्व का पहला भव्य नवग्रह शक्तिपीठ मंदिर पूरी तरह तैयार है, जहां नौ ग्रह अपनी-अपनी पत्नियों के साथ विराजमान होंगे। यह अनोखी अवधारणा न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से खास है, बल्कि डबरा को आध्यात्मिक पर्यटन के वैश्विक मानचित्र पर अलग पहचान दिलाने वाली है।


10 से 20 फरवरी तक प्राण-प्रतिष्ठा का महाआयोजन

पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने जानकारी दी कि नवग्रह शक्तिपीठ की प्राण-प्रतिष्ठा का भव्य महोत्सव 10 से 20 फरवरी तक आयोजित होगा। आयोजन की शुरुआत 10 फरवरी को स्टेडियम ग्राउंड से निकाली जाने वाली विशाल कलश यात्रा से होगी, जो नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई नवग्रह शक्तिपीठ पहुंचेगी। इस कलश यात्रा में 20 हजार से अधिक महिलाओं के शामिल होने की संभावना है।


पूरा नगर बना एक परिवार

डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि डबरा की सामूहिक आस्था का प्रतीक है। पूरा नगर एक परिवार की तरह इसे सफल बनाने में जुटा है और हर स्तर पर सहयोग कर रहा है। उनका विश्वास है कि विश्व का पहला नवग्रह शक्तिपीठ डबरा को अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।


जानिए दिनवार प्रमुख कार्यक्रम

11 से 13 फरवरी:

प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा शिव महापुराण कथा।

14 से 16 फरवरी:

प्रख्यात कवि कुमार विश्वास की भावनात्मक काव्य प्रस्तुति ‘अपने-अपने राम’।

17 से 20 फरवरी:

बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा एवं दिव्य दरबार।


यज्ञ, अनुष्ठान और विशेष साधना

इसी अवधि में नौ मंजिला भव्य यज्ञशाला में प्रतिदिन प्रत्येक ग्रह देवता के लिए एक-एक लाख आहुतियां दी जाएंगी। संत बद्रीश जी महाराज एवं उनके 70 उपासक विधि-विधान से अनुष्ठान संपन्न कराएंगे। वहीं दांती महाराज पूरे दस दिन विशेष साधना और अनुष्ठान करेंगे, जिससे आयोजन की आध्यात्मिक ऊर्जा और भी प्रबल होगी।

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