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NEET UG 2026: 2-3 मई को छुट्टी नहीं, मेडिकल कॉलेजों को सख्त निर्देश—व्यापमं के बाद कड़ा कदम

02 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
NEET UG 2026: 2-3 मई को छुट्टी नहीं, मेडिकल कॉलेजों को सख्त निर्देश—व्यापमं के बाद कड़ा कदम
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। NEET UG 2026 से ठीक पहले मध्य प्रदेश में बड़ा फैसला लिया गया है। मेडिकल कॉलेजों के छात्रों की 2 और 3 मई की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं, ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी गड़बड़ी को रोका जा सके।


क्यों रद्द हुई छुट्टियां? व्यापमं से जुड़ा कनेक्शन

राज्य में यह कदम पुराने व्यापमं घोटाले से सबक लेते हुए उठाया गया है। उस मामले में कई मेडिकल छात्र दूसरे परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा देते पकड़े गए थे। इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए अब प्रशासन किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। इसलिए छात्रों की गतिविधियों पर सख्त नजर रखने की तैयारी है।


NMC का सर्कुलर: सभी कॉलेजों को सख्त निर्देश

National Medical Commission (NMC) ने सभी मेडिकल कॉलेजों को साफ निर्देश दिए हैं कि 2-3 मई को किसी भी छात्र को अवकाश न दिया जाए। सर्कुलर में साफ कहा गया है कि पहले हुए मामलों को देखते हुए यह कदम जरूरी है, ताकि परीक्षा की निष्पक्षता बनी रहे। इसके बाद प्रदेश के कॉलेजों ने तुरंत आदेश लागू कर दिए।


भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में सख्ती

Gandhi Medical College के डीन ने छात्रों को अनिवार्य उपस्थिति के निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इन दो दिनों में सभी छात्रों को कॉलेज में मौजूद रहना होगा। इससे उनकी गतिविधियों की निगरानी आसान हो सकेगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को रोका जा सकेगा।


“औपचारिकता नहीं, एहतियात जरूरी”

अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ नियम निभाने के लिए नहीं, बल्कि एक ठोस एहतियाती कदम है। उनके अनुसार, मेडिकल छात्रों को कैंपस में रखकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे किसी भी तरह से NEET जैसी अहम परीक्षा में गलत तरीके से शामिल न हों। इससे परीक्षा की विश्वसनीयता भी बनी रहेगी।


दूसरी ओर RGPV में भुगतान संकट, परीक्षा व्यवस्था पर सवाल

इधर Rajiv Gandhi Proudyogiki Vishwavidyalaya (RGPV) में परीक्षा व्यवस्था अलग कारणों से सवालों में है। एक रिटायर्ड ऑब्जर्वर ने ₹80,000 से ज्यादा भुगतान अटकने पर ड्यूटी से इनकार कर दिया। इसमें ₹35,000 अगस्त परीक्षा और ₹46,000 दिसंबर व प्रैक्टिकल के शामिल हैं।


80 से ज्यादा ऑब्जर्वर्स का भुगतान लंबित

जानकारी के मुताबिक, सिर्फ एक नहीं बल्कि करीब 80 ऑब्जर्वर्स को दो सेमेस्टर से भुगतान नहीं मिला है। प्रति पेपर ₹500 मानदेय और ₹300 कन्वेंस तय होने के बावजूद रकम अटकी हुई है। यही वजह है कि कई लोग अब परीक्षा से जुड़े काम से दूरी बना रहे हैं।

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