
भोपाल। नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया गया है। हादसे में नेपाल और तिब्बत में 178 लोगों की मौत की जानकारी है, जबकि करीब 1,500 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर भी चिंता बनी हुई है। मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश के ऐसे नागरिकों और उनके परिजनों की मदद के लिए नई दिल्ली में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है, जहां से संकट में फंसे लोगों को सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
मध्य प्रदेश सरकार ने जारी किए हेल्पलाइन नंबर
नेपाल में मौजूद या वहां फंसे मध्य प्रदेश के नागरिक और उनके परिवारजन कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं। सरकार ने सहायता और जानकारी के लिए फोन, WhatsApp और ईमेल की सुविधा उपलब्ध कराई है।
संपर्क के लिए:
- हेल्पलाइन: 011-26772005
- WhatsApp: 9818963273
- ईमेल: recp1mpbhawan@mp.gov.in
सरकार का कहना है कि इन माध्यमों के जरिए नेपाल में फंसे मध्य प्रदेश के नागरिकों की स्थिति की जानकारी लेने और उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
नेपाल में 826 लोग लापता, 300 से ज्यादा भारतीय
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार नेपाल में 826 लोग लापता हैं। इनमें 300 से ज्यादा भारतीय नागरिक शामिल हैं।
बचाव कार्य में मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण मुश्किलें आ रही हैं। इसके बावजूद नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे क्षेत्र से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला है। इनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
नेपाल में फंसे भारतीयों की जानकारी जुटाने के लिए भारत सरकार ने भी राज्यों से संभावित लापता नागरिकों का विवरण साझा करने को कहा है, ताकि परिवारों और सरकारी एजेंसियों के बीच संपर्क बेहतर बनाया जा सके।
तिब्बत में भी सैकड़ों लोग लापता
चीन की सरकारी वेबसाइट CCTV के मुताबिक तिब्बत में 550 से ज्यादा लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है।
यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में आई, जहां तेज बहाव के साथ मलबे ने बस्तियों, सड़कों और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक और पर्यटक भी प्रभावित हुए हैं।
भूकंप नहीं, लैंडस्लाइड से पैदा हुआ था तेज झटका
बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटका महसूस हुआ था। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआत में इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप माना था।
बाद में सामने आया कि पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ ल्हेंदे खोला नदी में गिर गया था। इसके कारण मलबे और पानी का तेज बहाव पैदा हुआ।
USGS ने बाद में स्पष्ट किया कि करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप जैसा महसूस हुआ झटका बड़े लैंडस्लाइड की वजह से पैदा हुआ था। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें भी इस आपदा को हिमालयी ग्लेशियर के हिस्से के ढहने से जुड़े मलबे के तेज बहाव से जोड़ती हैं।
हाकू की सुरंग से 7 लोगों को बचाया
रसुवा के हाकू में हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की एक सुरंग में फंसे 7 लोगों को नेपाली सेना ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
सेना के अनुसार, तीन अन्य सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने का अभियान अभी जारी है। टिमुरे क्षेत्र में भी सेना का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
NDRF को नेपाल भेजने की तैयारी
भारत ने नेपाल की स्थिति को देखते हुए NDRF की टीमों को स्टैंडबाय पर रखा है। NDRF के IG नरेंद्र सिंह बुंदेला के मुताबिक फिलहाल भारत की कोई NDRF टीम नेपाल नहीं भेजी गई है।
नेपाल सरकार की ओर से मदद का अनुरोध आने और भारत सरकार की मंजूरी मिलने पर NDRF की टीमें तुरंत नेपाल रवाना की जा सकती हैं।
भारत सरकार ने मानवीय सहायता और आपदा राहत सामग्री लेकर दो विमान नेपाल भेजे हैं। केंद्र सरकार ने नेपाल की स्थिति पर नजर बनाए रखने और जरूरत वाले सीमावर्ती क्षेत्रों में राहत-बचाव तंत्र को हाई अलर्ट पर रखने की जानकारी भी दी है।
भारत ने नेपाल को भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
भारत ने नेपाल के लिए राहत सामग्री की दूसरी खेप भी रवाना कर दी है। भारतीय वायुसेना के विमान से भेजी गई इस खेप में 37.5 टन राहत सामग्री, जरूरी दवाइयां और खाद्य पैकेट शामिल हैं।
इससे पहले बुधवार रात C-130J विमान से 10 टन राहत सामग्री और जरूरी दवाइयों की पहली खेप काठमांडू भेजी गई थी।
दोनों खेपों को मिलाकर भारत की ओर से अब तक नेपाल को 47.5 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है।
MP के परिजनों के लिए जरूरी जानकारी
नेपाल में मौजूद किसी मध्य प्रदेशवासी से संपर्क नहीं हो पा रहा है या कोई नागरिक आपदा प्रभावित क्षेत्र में फंसा हुआ है, तो उसके परिजन सीधे मध्य प्रदेश सरकार के दिल्ली स्थित कंट्रोल रूम से संपर्क कर सकते हैं।
कंट्रोल रूम संपर्क:
फोन: 011-26772005
WhatsApp: 9818963273
ईमेल: recp1mpbhawan@mp.gov.in
नेपाल में राहत-बचाव अभियान कठिन परिस्थितियों के बीच चल रहा है। भारी मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और संचार व्यवस्था में आई बाधाएं रेस्क्यू टीमों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
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