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एमपी में 4 हजार मेगावाट की नई ताप विद्युत परियोजनाओं को मंजूरी, अनूपपुर बनेगा ऊर्जा हब

27 जन, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
एमपी में 4 हजार मेगावाट की नई ताप विद्युत परियोजनाओं को मंजूरी, अनूपपुर बनेगा ऊर्जा हब

एमपी में 4 हजार मेगावाट की नई ताप विद्युत परियोजनाओं को मंजूरी, अनूपपुर बनेगा ऊर्जा हब

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश अब ऊर्जा के क्षेत्र में एक नई छलांग लगाने जा रहा है। प्रदेश सरकार ने 4 हजार मेगावाट की नई ताप विद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को भोपाल के समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और ऊर्जा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इन परियोजनाओं के लिए एमओयू साइन किए जाएंगे। यह सभी परियोजनाएं अनूपपुर जिले में स्थापित होंगी और एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड के जरिए विकसित की जाएंगी।


डीबीएफओओ मॉडल पर हुआ चयन

इन परियोजनाओं का चयन DBFOO (Design, Build, Finance, Own & Operate) मॉडल पर प्रतिस्पर्धात्मक टेंडर प्रक्रिया के जरिए किया गया है। इस प्रक्रिया में कुल 3200 मेगावाट क्षमता के लिए तीन बड़े डेवलपर्स को चुना गया है। इसके साथ ही शासन की स्वीकृति से 800 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता का आवंटन भी किया गया है।


किन कंपनियों को मिली कितनी क्षमता?

सरकार द्वारा घोषित आवंटन के अनुसार—

हिंदुस्तान थर्मल प्रोजेक्ट्स लिमिटेड – 800 मेगावाट

टोरेंट पावर लिमिटेड – 1600 मेगावाट

अडानी पावर लिमिटेड – 800 मेगावाट

इसके अलावा ग्रीनफील्ड विकल्प के तौर पर भी 800 मेगावाट क्षमता का अलग से आवंटन किया गया है।


SPV के जरिए होंगे विद्युत आपूर्ति अनुबंध

इन सभी परियोजनाओं के लिए विद्युत आपूर्ति अनुबंध (PSA) संबंधित डेवलपर्स द्वारा गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) के साथ किए गए हैं। इससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन और संचालन में पारदर्शिता बनी रहेगी।


60 हजार करोड़ का निवेश, 8 हजार को मिलेगा रोजगार

इन ताप विद्युत परियोजनाओं से राज्य में करीब 60 हजार करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष निवेश आने की संभावना है। साथ ही, 3000 प्रत्यक्ष रोजगार और 5000 अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इससे अनूपपुर और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।


2030 तक पूरी होगी बिजली आपूर्ति

सरकार के अनुसार, इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद साल 2030 तक राज्य को स्थायी बिजली आपूर्ति मिल सकेगी। इससे उद्योगों, शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली संकट को दूर करने में मदद मिलेगी।

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