
भोपाल। मुझे लगता है कि हर बंदे की जर्नी अलग-अलग होती है किसी को गॉडफादर की बहुत जरूरत होती है और किसी के साथ ईश्वरीय कृपा होती है। मैं आपको ऐसा नहीं बोलूंगा कि मैं काफी स्ट्रगल किया और काम के लिए काफी धक्के खाए क्योंकि मेरे साथ शुरू से ही बहुत अच्छे लोग जुड़ गए थे। मुंबई का एक अपना कल्चर है। वहां बात करने,उठने बैठने लोगों से जुड़ने में ही काफी टाइम लग जाता है और मैं एक छोटे शहर से था। मेरे शहर और मुंबई में दिन रात का फर्क है तो उस स्पेस को समझते हुए मैं जैसे ही धीरे-धीरे आगे बढ़ा तो मुझे एक फिल्म ऑफर हो गई। जब तक मुझे समझ आता कि मुंबई का कल्चर क्या है तब तक मुझे एक फिल्म मिल गई और उसके बाद कुछ एडवर्टाइजमेंट आ गए बस इस तरह मेरा काम शुरू हो गया।ये कहना है फिलौरी,उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक,वीरे दी वेडिंग,मिशन मंगल, अंग्रेजी मीडियम और तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया जैसी फिल्मों में एक से बढ़कर एक सुपरहिट गीतों को अपनी आवाज से सजाने वाले सिंगर रोमी का। वह भोपाल के एक निजी कॉलेज में अपनी संगीतमय प्रस्तुति देने पहुंचे थे। इस दौरान न्यूज वर्ल्ड से खास बातचीत में उन्होंने अपना संगीतमय सफर साझा किया।
मैं पंजाब का कल्चर अपने म्यूजिक में ढाल रहा
मैं पंजाब के छोटे से शहर पटियाला से हूं और पंजाब का जो कल्चर है, जिस तरह का म्यूजिक, जिस तरह का फॉक म्यूजिक है पंजाब का, उसे पूरी दुनिया जानती है, मैं चाहता था कि उसे सिनेमा लेवल पर प्रेजेंट कर सकूं। मैं चाहता था कि फिल्म के सिनेमैटिक साउंड को अपने तरीके के म्यूजिक में ढाल सकूं बस उसके लिए मैं मुंबई आया। मुंबई आकर मुझे सिंगर बनने का मौका मिला फिर फिल्में आती गई और कारवां बढ़ गया।
निकनेम ही मेरा रियल नेम बन गया
मेरा निकनेम रोमी है मेरा पहले करणवीर रणवीर नाम था बचपन में मेरे घर वालों ने की थी पंडित को दिखाया तो उन्होंने कहा कि रास्ते नहीं कहां से इसका नाम रखो तो रणबीर से करणवीर कर दिया लेकिन मेरे घर का नाम रोमू था जो धीरे धीरे रोमी हो गया। स्कूल में तक कोई मुझे करणवीर कहकर नहीं बुलाता था यह सिर्फ बस एक पेपर में नाम रह गया फिर मुझे लगा कोई नाम साइलेंटली आपके साथ चल रहा है तो उसे चलने देते हैं और मैंने अपने नाम को बदला नहीं। इस तरह मेरा निकनेम रूमी ही मेरा परमानेंट नाम बन गया।
घर में ही मेरा संगीत की पहली पाठशाला
मेरे पापा म्यूजिशियन है और मेरी मां भरतनाट्यम टीचर हैं तो मेरे घर में पहले से ही म्यूजिक को डांस का कल्चर तो बचपन से था ही। वैसे मैं शुरू से सिंगर नही बनना बल्कि क्रिकेटर बनना चाहता था और कुछ लेवल तक मैंने क्रिकेट खेला भी है लेकिन जब मैं बड़ा होने लगा तो मुझे समझ आया कि यह गेम मेरे लिए नहीं है क्योंकि वहां बहुत सारे योग्य लोग पहले से ही थे इसलिए मैं अपने घर के पारिवारिक माहौल यानी म्यूजिक में वापस आ गया और वहां से मैंने अपनी जर्नी की शुरुआत की।
‛छल्ला’ गाने से इंडस्ट्री में पहचान मिली
मेरा पहला गाना दिलजीत दोसांझ के साथ फिलौरी फिल्म में था। इसके बाद बाकी गाने भी मेरे अच्छे चले लेकिन ‛उरी,द सर्जिकल स्ट्राइक’ फिल्म का ‛छल्ला’ गाना ऐसा था जिससे मुझे एकदम से टर्निंग पॉइंट आया और मैं लोगों की नजरों में आ गया। फिलौरी से उरी तक पहुंचने में 3 साल का समय लगा था और फिर वहां से फिर मेरे लिए नए रास्ते खुले और मुझे लोगों ने और भी जानना शुरू किया। बस इसी तरह मेरा संगीत का ये सफर आगे चलता रहा।
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