
भोपाल। मेरे पापा एक बिजनेसमैन थे वैसे मैं एक किसान परिवार से भी ताल्लुक रखता हूं और जहां तक संगीत की बात है तो मैं संगीत को चुनने वाला भला कौन होता हूं।दरअसल मैंने संगीत को नहीं बल्कि संगीत ने मुझे चुना है। मुझे हमेशा से ही संगीत से प्यार रहा है और लोगों के सामने परफॉर्म करना एक अलग ही सुकून देता है जैसे आज भोपाल की ऑडियंस के सामने परफॉर्म करने का एक्सपीरिएंस शानदार था।मैं भोपाल बार बार आना चाहूंगा।ये कहना है ‛मनमा इमोशन जागे’ ‛बुल्लेया’ ‛सौ तरह के दर्द’ ‛गलती से मिस्टेक’ और ‛ओले ओले’ सहित कई सुपरहिट गीतों को अपनी आवाज से सजाने वाले बॉलीवुड सिंगर ‛अमित मिश्रा’ का। वह भोपाल स्थित ‛आईईएस कॉलेज’ में अपनी संगीतमय प्रस्तुति देने पहुंचे थे। इस दौरान ‛न्यूज वर्ल्ड’ से खास बातचीत में उन्होंने अपना संगीतमय सफर साझा किया।
‛मनमा इमोशन जागे’ गाने से लोगों ने नोटिस किया
मुझे याद है विक्रम भट्ट की 1920, द ईविल रिटर्न्स फिल्म के ‛मजबूर तू भी कहीं’ गाने के आने के बाद मैं स्टूडियों सेशन करने लगा था। बाद में ‛दिलवाले’ फिल्म से मेरे करियर को बूम मिला। मुझे इंडस्ट्री में ‛मनमा इमोशन जा’गे गाने से लोगों ने नोटिस किया जिसके बाद फिर ‛बुल्लेया’ से मुझे ग्लोबल फेम मिला,फिर ‛गलती से मिस्टेक’ ‛सौ तरह के’ ‛ओले ओले’ एक के बाद एक गाने आते रहे और लोगों का प्यार मिलता रहा। मैं इसके लिए अपने माँ- बाप और महादेव का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।
भाषा कभी भी संगीत में बाधा नही बनी
भाषा कभी भी संगीत में बाधा नही बनती है। मैंने बहुत सी भाषाओं में गाने गाए हैं अभी हाल ही मैं ‛उठ के जांदी’ सॉन्ग गाया जो एक इंडी-पंजाबी ट्रैक है ये एक नया टेक्सचर है,स्टाइल है, जो मैंने सीखने की कोशिश की है।इसके अलावा मैंने अभी तक बंगाली गाना गाया है,मराठी गाया है, गुजराती गाना बाकी है,उड़िया बाकी है।
रियलिटी शो ने आर्टिस्टों को काफी अवसर दिए
जब से ग्लोबल प्लेटफॉर्म तक आर्ट पहुंचा है तब से सिंगर्स के लिए काफी सारे अवसर निकले हैं। म्यूजिक रियलिटी शो से काफी सारे अच्छे सिंगर इंडस्ट्री को मिले हैं। ये शो लोगों की प्रतिभा को सामने लाने का काम कर रहे हैं और इन्हें एक बड़ा प्लेटफॉर्म भी दे रहे हैं इसलिए ये काफी महत्व रखते हैं आर्टिस्ट के लिए।
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