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जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, NH-45 पर टोल 70% कम, शाहपुरा आरओबी मरम्मत तेज करने के निर्देश

25 जुल, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
जबलपुर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, NH-45 पर टोल 70% कम, शाहपुरा आरओबी मरम्मत तेज करने के निर्देश
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग-45 (NH-45) की खराब स्थिति और शाहपुरा आरओबी के क्षतिग्रस्त हिस्से को लेकर चल रहे विवाद में जबलपुर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट की सख्ती के बाद एनएचएआई ने शाहपुरा टोल प्लाजा पर यूजर फीस में करीब 70 प्रतिशत की कटौती कर दी है।


कोर्ट ने टोल वसूली पूरी तरह रोकने की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन शाहपुरा आरओबी की मरम्मत में तेजी लाने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की राय लेकर काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।


हाईकोर्ट ने क्या कहा?

एसीजे विवेक रूसिया और न्यायाधीश प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि मार्ग का केवल 4.8 किलोमीटर हिस्सा ही डायवर्ट किया गया है। इस कारण पूरे मार्ग के लिए टोल वसूली पर पूर्ण रोक लगाने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। पीठ ने यह भी दर्ज किया कि 24 जून से एनएचएआई ने शाहपुरा टोल प्लाजा पर लागू यूजर फीस में लगभग 70% की कमी कर दी है।


पौड़ी रेलवे गेट खोलने की मांग खारिज

याचिकाकर्ता ने वैकल्पिक मार्ग के तौर पर पौड़ी रेलवे गेट खोले जाने की मांग की थी। अदालत ने इस मांग को सुरक्षा और तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए स्वीकार नहीं किया।


जनहित याचिका के बाद हुई सुनवाई

खराब सड़क और शाहपुरा के पास ओवरब्रिज का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने के बावजूद टोल वसूली जारी रहने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एनएचएआई से जवाब मांगा और राष्ट्रीय राजमार्ग-45 की स्थिति पर गंभीर रुख अपनाया।


पुल को लेकर याचिका में क्या कहा गया

याचिका में बताया गया कि जबलपुर-भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग-45 पर करीब ₹400 करोड़ की लागत से निर्मित पुल का एक हिस्सा ढह गया। पुल निर्माण के करीब तीन वर्ष के भीतर ही वह क्षतिग्रस्त हो गया और कई महीने बीतने के बाद भी मरम्मत का कार्य पूरा नहीं हो सका। वाहन चालकों ने भी खराब सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के बावजूद टोल वसूली जारी रहने पर नाराजगी जताई थी।


फास्ट ट्रैक कोर्ट भी किए गए तय

इसी दौरान मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) एक्ट, 2024' के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर में फास्ट ट्रैक कोर्ट निर्धारित किए हैं। इस व्यवस्था की घोषणा पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कर चुके हैं।

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