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मध्यप्रदेश का नूरजहां आम बना विदेशी बाजार का स्टार, एक फल की कीमत सुन चौंक जाएंगे

22 मई, 20260 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
मध्यप्रदेश का नूरजहां आम बना विदेशी बाजार का स्टार, एक फल की कीमत सुन चौंक जाएंगे
Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। आम को फलों का राजा कहा जाता है, लेकिन मध्यप्रदेश का एक खास आम अब दुनिया भर में अपनी अलग पहचान बना चुका है। आलीराजपुर जिले में पैदा होने वाला नूरजहां आम अपने विशाल आकार, शानदार स्वाद और हजारों रुपए कीमत के कारण चर्चा में है। यही वजह है कि इसे अब “किंग ऑफ मैंगो” कहा जाने लगा है। इस खास आम की डिमांड सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। खाड़ी देशों से लेकर अमेरिका और ब्रिटेन तक लोग इसे खरीदने के लिए उत्साहित रहते हैं।


5 किलो तक वजन, एक आम की कीमत 3000 रुपए

नूरजहां आम को दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्य तौर पर इसका वजन 2 से 5 किलोग्राम तक पहुंच जाता है। यही वजह है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए काफी माना जाता है। बाजार में इसकी कीमत 1500 रुपए से लेकर 3000 रुपए प्रति फल तक पहुंच जाती है। खास बात यह है कि इतनी महंगी कीमत होने के बावजूद इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।


आलीराजपुर की मिट्टी ने बनाया खास

मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र की जलवायु और मिट्टी नूरजहां आम के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। यहां का तापमान और वातावरण इस आम को अलग स्वाद और गुणवत्ता देता है। इसी कारण यहां पैदा होने वाले नूरजहां आम की खुशबू, रंग और मिठास लोगों को पहली नजर में आकर्षित कर लेते हैं। अब यह आम प्रदेश की उद्यानिकी पहचान बन चुका है।


अफगानिस्तान से मालवा तक का सफर

नूरजहां आम का इतिहास भी काफी दिलचस्प माना जाता है। माना जाता है कि यह प्रजाति वर्षों पहले अफगानिस्तान से भारत आई और बाद में मालवा तथा झाबुआ-आलीराजपुर क्षेत्र में विकसित हुई। मुगलकाल में बड़े आकार वाले आमों को शाही बागों में विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ आदिवासी अंचलों तक पहुंची और किसानों ने पीढ़ी दर पीढ़ी इसका संरक्षण किया।


किसान परिवार ने बचाई दुर्लभ किस्म

ग्राम जूना कट्ठीवाड़ा के किसान भरतराजसिंह जादव बताते हैं कि उनके पिता स्वर्गीय रणवीरसिंह जादव करीब 55 से 60 साल पहले गुजरात क्षेत्र से नूरजहां आम का पौधा लाए थे। उन्होंने वर्षों तक इस दुर्लभ पौधे को संभालकर रखा। बाद में ग्राफ्टिंग तकनीक से इसका नया पौध तैयार किया। आज उनके खेत में तैयार किए गए कई ग्राफ्टेड पौधे विकसित हो रहे हैं।


राष्ट्रीय सम्मान ने दिलाई अलग पहचान

नूरजहां आम की खासियत को देखते हुए इसे 1999 और 2010 में राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया गया। इन पुरस्कारों के बाद आलीराजपुर जिले को देशभर में नई पहचान मिली। धीरे-धीरे यह आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की प्रीमियम पहचान बन गया। अब इसे “लक्ज़री मैंगो” के रूप में भी देखा जाने लगा है।


विदेशों में क्यों बढ़ रही इतनी डिमांड?

संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों की काफी मांग रहती है। बड़े आकार और आकर्षक लुक के कारण नूरजहां आम वहां तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी इसकी जबरदस्त मांग है। सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी यह आम अपनी अलग पहचान बना रहा है।


सीमित उत्पादन बढ़ा रहा कीमत

नूरजहां आम की सबसे बड़ी खासियत इसकी दुर्लभता भी है। इसके पेड़ों पर सीमित संख्या में ही फल आते हैं, इसलिए इसका उत्पादन बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता। कम उत्पादन और ज्यादा मांग के कारण यह आम अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेहद प्रीमियम माना जा रहा है। यही वजह है कि विदेशी बाजारों में इसे “लक्ज़री मैंगो” के तौर पर देखा जा रहा है।

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