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Madhaya Pradesh

अब 15 नवंबर को भी खुलेंगे जेल के दरवाजे! बिरसा मुंडा जयंती पर रिहा होंगे कैदी, ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा एमपी

14 नव, 20250 व्यूज4 मिनट पढ़ाई
अब 15 नवंबर को भी खुलेंगे जेल के दरवाजे! बिरसा मुंडा जयंती पर रिहा होंगे कैदी

अब 15 नवंबर को भी खुलेंगे जेल के दरवाजे! बिरसा मुंडा जयंती पर रिहा होंगे कैदी

Sanju Suryawanshi
डेस्क रिपोर्टर
Sanju Suryawanshi

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य की सेंट्रल जेलों में बंद अच्छे आचरण वाले कैदियों को 15 नवंबर, यानी भगवान बिरसा मुंडा की जयंती पर भी रिहा किया जाएगा। यह निर्णय प्रदेश की नई सुधार नीति के तहत लिया गया है, जिसके अनुसार विशेष अवसरों पर सजा में छूट देकर बंदियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जाएगा।


32 कैदी होंगे रिहा, जिनमें 9 आदिवासी बंदी भी शामिल

प्रदेश की सभी सेंट्रल जेलों से कुल 32 बंदियों को रिहा किया जा रहा है। जिनमें जबलपुर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस सेंट्रल जेल से भी बंदियों की रिहाई होगी। इनमें 9 आदिवासी कैदी शामिल हैं, जिन्हें अच्छे आचरण और अनुशासन के आधार पर यह मौका मिला है।


बिरसा मुंडा जयंती पर सरकार की नई पहल

15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को देशभर में राष्ट्रीय जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर को मध्यप्रदेश सरकार ने सुधार और सम्मान दोनों से जोड़ा है। अब हर साल इस दिन अच्छे आचरण वाले कैदियों को भी सजा से राहत दी जाएगी। इससे पहले केवल स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती और डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर रिहाई होती थी। इसके साथ ही मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जो अब साल में 5 अवसरों पर आजीवन कारावास भुगत रहे कैदियों को रिहा करेगा।


7 नवंबर को जारी हुआ था शासन का आदेश

जेल विभाग ने 7 नवंबर 2025 को इस संबंध में आदेश जारी किए थे। विभाग के अनुसार, “जिन बंदियों का आचरण जेल में अनुकरणीय पाया गया है और जिन्होंने सजा का अधिकांश भाग पूरा कर लिया है, उन्हें कानून के प्रावधानों के तहत छूट का लाभ दिया जाएगा।” इस पहल का उद्देश्य न केवल कैदियों को सुधार का मौका देना है, बल्कि यह भी दिखाना है कि समाज में दूसरा अवसर हर किसी को मिलना चाहिए।


जनजातीय गौरव और सुधार की नई मिसाल

बिरसा मुंडा की जयंती पर रिहाई का यह कदम न केवल जनजातीय गौरव दिवस का सम्मान है, बल्कि यह भी संदेश देता है कि सुधार और अनुशासन के मार्ग पर चलने वालों के लिए आज़ादी का रास्ता हमेशा खुला है।

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