
भोपाल। अब जमीन-जायदाद या कानूनी दस्तावेजों की रजिस्ट्री के लिए रजिस्ट्रार ऑफिस की लंबी लाइनें और दलालों के चक्कर इतिहास बनने वाले हैं। मध्यप्रदेश सरकार साइबर तहसील की सफलता के बाद अब ‘साइबर रजिस्ट्रार’ व्यवस्था शुरू करने जा रही है, जिसके तहत आप अपने घर बैठे ही दस्तावेजों का पंजीयन करा सकेंगे – वो भी वीडियो कॉल और डिजिटल साइन के जरिए।
75 से ज्यादा सेवाएं होंगी ऑनलाइन
नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्रार विभाग से जुड़ी 75 से ज्यादा सेवाएं साइबर रजिस्ट्रार के माध्यम से मिलेंगी। हालांकि फिलहाल जमीन की खरीदी-बिक्री यानी सेल डीड इस दायरे में नहीं आएगी। शुरुआत आईजी पंजीयन कार्यालय से होगी और फिर इसे जिलों तक बढ़ाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जल्द ही इस डिजिटल सुविधा का शुभारंभ करेंगे।
संपदा-2.0 से पूरी तरह वर्चुअल सिस्टम
यह नई सुविधा संपदा-2.0 सॉफ्टवेयर पर आधारित होगी। इसमें स्लॉट बुकिंग, दस्तावेज अपलोड, वीडियो वेरिफिकेशन, ई-साइन और पंजीयन प्रमाण पत्र सब कुछ ऑनलाइन होगा। यानी अब किसी को दफ्तर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विदेश से भी हो सकेगी रजिस्ट्री
इस सिस्टम की खास बात यह है कि मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के दूसरे राज्यों या विदेश में रहने वाले लोग भी अपनी प्रॉपर्टी या दस्तावेजों की साइबर रजिस्ट्री करा सकेंगे। ट्रायल के तौर पर पहले ही हांगकांग से भोपाल की और नीदरलैंड्स से इंदौर की प्रॉपर्टी की ऑनलाइन रजिस्ट्री हो चुकी है — बिना भारत आए।
आईजी पंजीयन का दावा – सिस्टम होगा पूरी तरह फेसलेस
आईजी पंजीयन अमित तोमर के मुताबिक,
आईजी ऑफिस में साइबर रजिस्ट्रार के लिए पूरा सेटअप तैयार है और 6 सब-रजिस्ट्रार तैनात कर दिए गए हैं। शुरुआती दौर में लीज, पावर ऑफ अटॉर्नी और हलफनामा जैसे दस्तावेजों की रजिस्ट्री की जाएगी। सारी प्रक्रिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी।
आधार, वीडियो और आईडी से होगा सत्यापन
साइबर रजिस्ट्री के लिए आधार नंबर अनिवार्य होगा, वीडियो रिकॉर्ड की जाएगी, सिर घुमाकर फेस वेरिफिकेशन होगा और फिर वोटर आईडी, पासपोर्ट, पैन या ड्राइविंग लाइसेंस से मिलान किया जाएगा। AI सिस्टम सभी डाटा को मैच करेगा, तभी रजिस्ट्री पूरी होगी।
हर दस्तावेज में सब-रजिस्ट्रार जरूरी नहीं
75 तरह के दस्तावेजों में से कुछ में सब-रजिस्ट्रार वीडियो कॉल पर जुड़ेंगे, कुछ में यह वैकल्पिक होगा। किस डॉक्युमेंट में क्या प्रक्रिया होगी, यह सिस्टम खुद बताएगा।
बिना दबाव की घोषणा जरूरी
हर व्यक्ति को यह डिजिटल घोषणा करनी होगी कि वह “किसी दबाव में नहीं है और अपनी मर्जी से रजिस्ट्री कर रहा है।” इसके लिए पहले ई-केवाईसी और ई-साइन होगा।
सरकार को भी मिलेगा अतिरिक्त राजस्व
इस साइबर सुविधा के लिए सरकार अलग से पंजीयन शुल्क भी तय करेगी, जिससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा और लोगों का समय भी बचेगा।
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